जनता को गुमराह न करें सासंद इस्तीफा दें - विजय सिंह गोंड
जनता को गुमराह न करें सासंद इस्तीफा दें - विजय सिंह गोंड
जनता को गुमराह न करें सासंद इस्तीफा दें - विजय सिंह गोंड
बभनी में हुआ आदिवासी सम्मेलन
हजारों की संख्या में जुटे आदिवासियों ने कहा लेकर रहेंगे अपना अधिकार
बभनी 13 सितम्बर 2016, भाजपा के वर्तमान सांसद पर हमें दया आती है उन्हें तो उनकी पार्टी में कुर्सी पर बैठने की जगह तक नहीं मिलती है। उनकी सरकार संसद से आदिवासियों के आरक्षण का विधेयक वापस ले लेती है और वह बोल तक नहीं पाते। उन्हें जनता को गुमराह करने की जगह अपनी पार्टी के आदिवासी विरोधी रूख पर इस्तीफा देना चाहिए।
यह बातें आज बभनी में आयोजित आदिवासी अधिकार सम्मेलन में पूर्व विधायक व आदिवासी नेता विजय सिंह गोंड ने कहीं।
उन्होंने कहा कि भाजपा के सासंद को यह भी नहीं पता कि आदिवासियों के सीट आरक्षण के बिल के लिए उ0 प्र0 में सरकार होना और राज्यसभा में बहुमत होना जरूरी नहीं है। क्योकि भारत निर्वाचन आयोग ने विधिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए पहले ही दुद्धी व ओबरा को आदिवासी सीट के बतौर घोषित करने की अधिसूचना जारी कर दी है। इतना ही नहीं संसद की सर्वोच्च संस्था स्थायी समिति ने भी इस बिल को पास करने की संस्तुति कर दी है। बाबजूद इसके इस बिल को वापस लेकर मोदी सरकार ने धोखा दिया।
विजय सिंह गोंड ने कहा कि जीरा बेचने वाली दुकान से डीजल नहीं खरीदा जाता। भाजपा की केन्द्र सरकार थी। आदिवासी हितों की पूर्ति के लिए भाजपा में गया था और जब यह नहीं हुआ तो भाजपा में रहने का कोई औचित्य नहीं रह गया था।
बभनी सम्मेलन में हर गांव से हजारों की संख्या में आदिवासी जुटे थे जिन्होंने अपने अधिकार हर हाल में हासिल करने की हुकांर भरी।
सम्मेलन की अध्यक्षता गुलाब खरवार गोहा और संचालन इंद्रदेव खरवार ने किया।
सम्मेलन में बोलते हुए आदिवासी अधिकार मंच के संयोजक व आइपीएफ महासचिव दिनकर कपूर ने कहा कि आदिवासी समाज पर मोदी सरकार का हमला नागरिक अधिकार और संविधान पर हमला है। जिसकी रक्षा के लिए चल रहे इस अभियान में उन्होंने हर दल, संगठन में शामिल आदिवासी हितैषी, जनपक्षधर लोगों से शामिल होने की अपील की।
सम्मेलन को प्रधान बबई गोंड, जिला पंचायत सदस्य बिरझन पनिका, प्रधान संजय गुप्ता, लक्ष्मी जायसवाल, रधु सिंह, पूर्व प्रधान रामबरन, देव कुमार विश्वकर्मा, रामजीत खरवार, रमेश सिंह खरवार, पूर्व जिला पंचायत सदस्य पन्नालाल, राम नारायन, प्रमोद चौबे ने सम्बोधित किया।


