जब अटल ने भीड़ को सीधे उकसाया था लिंचिंग के लिए, नतीजे सामने आ रहे

मधुवन दत्त चतुर्वेदी

फिर मॉबलिंचिंग !
कल आसाम में विश्वनाथ जिले में फिर एक व्यक्ति को भीड़ ने गौ-तस्करी के आरोप लगा कर मार डाला।

सन 1983 में अटल जी ने आसाम दौरे पर विदेशी शरणार्थियों को लक्ष्य कर असम के मुकामी लोगों को ललकार के कहा था, 'सुना है यहां सीमा पार से लोग आ रहे हैं और सरकार कुछ नहीं कर रही ... पंजाब में ऐसा होता तो लोगों ने ही उन्हें काट काट कर बिखेर दिया होता।'

यह सीधे तौर पर मॉबलिंचिंग या भीड़ को हिंसा का उकसावा नहीं था क्या ? क्या यह बात झुंड बनाकर किसी बात के लिए बिना कानूनी तरीके से किसी को काट देने की सैद्धांतिक पुष्टि नहीं है ?

इसी बयान के बाद नेल्ली नरसंहार हुआ था।

अटल जी अब नहीं रहे। लिंचिंग के बीज जो बिखेरे थे उनके बृक्ष कल विश्वनाथ जिले में ही नहीं आज उनकी शोकसभा में भी दिखे जहाँ अग्निवेश पिटे।