राम देव विज्ञापन का मायावी है
Ramdev is Advertising elusive
राजीव नयन बहुगुणा

जब गर्मी सताये, तो कम्प्यूटर पर बैठ बर्फ़ के चित्र देखो। बार-बार पहाड़ न जाओ। जब जाओ तो वहां तमीज़ से रहो। धमाल न मचाओ। प्लास्टिक, पॉलीथिन और अपने मन की गन्दगी वहां न छोडो। गर्म कपड़े वहीं के स्थानीय अभिक्रम से निमिर्मित खरीदो, और भोजन भी स्थानीय करो। चाउमिन न खाओ। बिसलेरी न पीओ। पहाड़ के हर झरने का पानी मिनरल वाटर है। रामदेव के झांसे में आकर उसकी चीजें मत खरीदो। जब पहाड़ भी गर्म और कलुषित हो जाएंगे, तो कहाँ जाओगे।
जहाँ तक सम्भव हो कार की बजाय बस से जाओ।
गाड़ी तेज़ न हांको। हॉर्न कम बजाओ। पहाड़ी नदी में गहरे न उतरो। सेल्फ़ी लेते वक़्त बन्दर और चिंपैंजी जैसी शक़्ल न बनाओ। वहां के लोक देवताओं का सम्मान करो। ये गैर साम्प्रदायिक और सरल होते हैं। इनका सांस्कृतिक महत्व भी है।
मसूरी, नैनीताल की अपेक्षा ग्वालदम, गैरसैण, सोमेश्र्वर, जगेश्र्वर, चोपता, पंवाली जाओ।
मसूरी - नैनीताल में ठग्गू का समोसा बिकता है। छोटी जगहों पर प्यार और सम्मान मिलेगा।
निन्देह यहां लड़कियां छेड़ोगे और नंगा नाच करोगे, तो बुरे पिटोगे। भागने का कोई रास्ता नहीं रहता। जिस रास्ते से आये हो, उसी से जाना भी पड़ता है।
हरिद्वार या देहरादून अथवा हल्द्वानी में कभी नाइट स्टे मत करो। कुछ आगे बढ़ कर ही छोटी, लेकिन सौम्य बस्तियां मिलेंगी।
और अंत में पुनः नेक सलाह।

राम देव का उत्पाद कभी न खरीदना। वह विज्ञापन का मायावी है, और कुछ नहीं।