आज श्रीमती सोनिया गाँधी जी का जन्‍मदिवस है। मुझे याद है जब 2002 मेँ विश्‍वनाथ प्रताप सिंह जी का स्‍वास्‍थ्‍य बिगड़ा और हम उनसे मिलने गये तो उन्‍होंने एक बात कही कि मेरे जीवन का कोई भरोसा नहीं, अब आप लोग यदि राजनीति में अपना स्‍वार्थ देख रहे हैं किसी पार्टी मेँ तो वहाँ जाइये और अगर देश का स्‍वार्थ देख रहे हैं तो काँग्रेस ज्‍वाइन कर लीजिए....फिर हमारे आग्रह पर ही उन्‍होंने सोनिया जी से हमारी भेँट की व्‍यवस्‍था करवाई।
हम जब सोनिया जी से मिलने उनके कार्यालय गए तो तुरन्त हमारी उनसे भेंट करवाई गई... हमारे भीतर पहुँचते ही हम उनका अभिवादन करेँ, उससे पहले ही सोनिया जी ने कुर्सी से उठकर ही हमको दोनों हाथ जोड़ते हुए प्रणाम कहा। हम उनकी विनम्रता देख अभिभूत हो गए... हमारी अगुआई कर रहे इलाहाबाद के पूर्व मंत्री राजेँद्र त्रिपाठी जी ने जब बातचीत शुरू की, तो उन्‍होंने यह सोचकर कि शायद सोनिया जी हिन्दी ना समझ सकेँ अँग्रेजी मैं बोलना शुरू किया। सोनिया जी के सलाहकार अहमद पटेल जी उनके बगल मेँ ही थोड़ा पीछे कुर्सी पर बैठे थे... सोनिया जी ने त्रिपाठी जी की बात ध्‍यान से सुनी और जब उन्‍होंने जवाब दिया तो शुद्ध हिन्दी मेँ उन्‍होंने अपनी बात कही और अन्त मेँ कहा कि यदि आप लोगों को हिन्दी मेँ बोलने मेँ असुविधा ना हो तो हिन्दी मेँ ही बातचीत की जाए... यह सुनते ही हम शर्म से पानी पानी हो गए....
खैर आगे बातचीत हिन्दी मेँ ही हुई। हम सभी लोगोँ से अलग अलग मुखातिब होकर उन्‍होंने बात की और जब बातचीत खत्‍म कर हम चलने लगे तो सोनिया जी उठकर हमें कक्ष के निकासी द्वार तक छोडने आईँ और वहाँ हाथ जोडकर फिर विदाई अभिवादन किया। उनकी सौम्‍यता , शिष्‍टता के हम कायल हो चुके थे, वापसी तक.....ऎसी विनम्र और भारतीय सँस्‍कृति मेँ पूरी तरह रची बसी महिला के जन्‍मदिन पर हम उनके दीर्घायु होने की कामना करते हैँ...... श्रीमती सोनिया गाँधी जी के दीर्घायु होने की कामना करते हैँ हम..
O- रामेन्द्र जनवार
रामेन्द्र जनवार, लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं। वे लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ के महामंत्री व ऑल इण्डिया स्टूडेंट्स फेडरेशन की उप्र इकाई के अध्यक्ष रहे हैं।