जस्टिस मार्कण्डेय काटजू का स्थानीय भाषा में संवाद और क्षेत्रीय भाषाएं सीखने पर जोर
जस्टिस मार्कण्डेय काटजू का स्थानीय भाषा में संवाद और क्षेत्रीय भाषाएं सीखने पर जोर
जस्टिस मार्कण्डेय काटजू का स्थानीय भाषा में संवाद और क्षेत्रीय भाषाएं सीखने पर जोर
Justice Markandey Katju insists on communicating in the local language and learning regional languages
नई दिल्ली, 27 अक्तूबर। सर्वोच्च न्यायालय के अवकाशप्राप्त न्यायधीश जस्टिस मार्कण्डेय काटजू ने स्थानीय भाषा में संवाद और क्षेत्रीय भाषाएं सीखने पर जोर दिया है।
जस्टिस काटजू ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर लिखा कि सर्वोच्च न्यायालय में बहुत से तमिल वकील हैं। जब मैं सर्वोच्च न्यायालय जज बन गया तो मैंने उनसे संवाद कायम करने के लिए तमिल के बहुत से शब्द सीखे।
अवकाशप्राप्त न्यायधीश ने कहा कि अगर कोई तमिल वकील बकवास बात कर रहा होता था (जो आम तौर पर नहीं होता था क्योंकि उनमें से अधिकांश तीक्ष्ण बुद्धि और ज्ञानी हैं) तो मैं कहता था "unga argumentle un ille" यानी "आपके तर्क में कुछ भी नहीं है"।
और फिर मैं कहता "okaarunga" यानी "कृपया बैठ जाओ"।
जस्टिस काटजू ने कहा कि अब अगर मैंने इसे अंग्रेजी में कहा होता तो वकील ने शायद अपराध मान लिया होता। लेकिन जब मैंने इसे उनकी अपनी भाषा में कहा तो वह मुस्कुरा कर बैठ जाता।
और बेशक एक बहुत ही उपयोगी तमिल शब्द था जो मैंने अक्सर इस्तेमाल किया: "tallupadi" यानी "ख़ारिज"।
जस्टिस मार्कण्डेय काटजू सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स खासकर फेसबुक और ट्विटर पर काफी सक्रिय रहते हैं और लगभग सभी बड़े समसामयिक मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखते हैं। जस्टिस मार्कण्डेय काटजू प्रेस कोंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन भी रहे हैं।


