नई दिल्ली। अमेरिका के दोनों प्रमुख दलों ने अमेरिकी सरकार से संयुक्त रूप माँग की है कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के अमेरिकी वीज़ा पर प्रतिबंध जारी रहे और गुजरात के दंगों में पीड़ितों को न्याय मिले।

अमेरिका के हाउस आफ रिप्रेजेन्टेटिव में डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन, दोनों पार्टियों की ओर से नरेन्द्र मोदी को अमेरिका में घुसने नहीं दिया जाए, इस आशय का जो द्विपक्षीय प्रस्ताव पेश किया गया है। यह प्रस्ताव डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से कैथ इलिसन और रिपब्लिकन पार्टी की ओर से जो पिट्स ने संयुक्त रूप में पेश किया है। इस प्रस्ताव को एक दर्जन से भी ज़्यादा अमेरिकी क़ानून-निर्माताओं ने समर्थन दिया है।

एक अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित खबर के अनुसार इस प्रस्ताव में अमेरिकी सरकार से कहा गया है कि भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी को जनता की धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करने के अपराध के आधार अमेरिका में आने का वीजा नहीं दिये जाने की नीति को जारी रखा जाना चाहिए। इस प्रस्ताव में भारत सरकार से भी यह माँग की गयी है कि वह देश के धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों और स्वतंत्रताओं को पूरी सुरक्षा प्रदान करें तथा अमेरिकी सरकार से माँग की गयी है कि इस विषय को भारत के साथ रणनीतिक वार्ता का अंग बनाया जाए।

प्रस्तावक एलिसन ने कहा है कि इस प्रस्ताव को दोनों पक्षों के समर्थन से ही यह साफ़ हो जाना चाहिए कि अमेरिका के लिए भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा का सवाल एक प्राथमिकता है। इस प्रस्ताव को पेश करने के बाद विचार के लिये एशिया और पैसिफ़िक की सदन की विदेशी मामलों की उपसमिति के विचार के लिये भेज दिया गया है। इतिहास के पन्ने पलट कर देखे जाएं तो मालूम पड़ता है कि अमेरिकी कांग्रेस के अधिकांश सदस्य इन कमेटियों के निर्णय के पक्ष में होते हैं।

इस प्रस्ताव में कहा गया है कि "सभी भारतीयों को अपने धर्म के पालन की या अपनी मर्ज़ी से अपना धर्म बदलने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।

"भारत अपने सभी नागरिकों के लिये काफ़ी विशाल है। उसके श्रेष्ठ नेताओं ने वहाँ के अलग-अलग लोगों की एकता के लिये, न कि विभाजन के लिये काम किया है।"

पिट्स ने अपने बयान में कहा है कि "गुजरात की तरह के दंगों से पीड़ित जन न्याय की अपेक्षा रखते हैं।"

प्रस्ताव में धार्मिक स्वतंत्रता पर चिंता ज़ाहिर करते हुए "भारत की समृद्ध धार्मिक विविधता और सहिष्णुता तथा समानता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता" की प्रशंसा की गयी है।

इस प्रस्ताव में सन् 2002 की गुजरात एकतरफा सांप्रदायिक हिंसा में नरेन्द्र मोदी की भूमिका को भी साफ़ शब्दों में रेखांकित किया गया है।