जिग्नेश मेवाणी का सभी प्रगतिशील ताकतों से साथ आने का आह्वान
मुकुल सरल

बीती 20 अगस्त को प्रेस क्लब, दिल्ली में ऊना (गुजरात) आंदोलन के प्रमुख चेहरे जिग्नेश मेवाणी से मुलाकात हुई। उनसे मुलाकात और संवाद का यह कार्यक्रम मीडिया स्टडीज ग्रुप, दिल्ली ने आयोजित किया था। जिग्नेश ने जिस साफगोई से अपनी बात रखी और सभी सवालों का जिस बेबाकी से जवाब दिया उससे इस आंदोलन को लेकर एक बेहतर उम्मीद जगती है।
उन्होंने साफ किया कि दलितों का यह आंदोलन अचानक या एक दिन में खड़ा हुआ आंदोलन नहीं है, बल्कि इसके पीछे गुजरात में लंबे समय से दलितों पर हो रहे अत्याचार की घटनाओं का इतिहास है। ऊना में अत्याचार की घटना इस आंदोलन के लिए ज़रूर एक निर्णायक मोड़ साबित हुई।

जिग्नेश मेवाणी ने साफ किया कि यह सिर्फ़ एक टिपिकल दलित आंदोलन नहीं है,
बल्कि यह पूरे भारतीय समाज का आंदोलन है इसलिए सभी प्रगतिशील ताकतों के इसके साथ जुड़ना चाहिए।
जिग्नेश ने इस मौके पर अपने ऊपर लग रहे कई तरह के आरोपों पर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि एक आरोप यह भी है कि इस आंदोलन के पीछे आम आदमी पार्टी है। उन्होंने साफ किया कि वह आम आदमी पार्टी के सदस्य ज़रूर रहे हैं लेकिन आम आदमी पार्टी ने इस आंदोलन का अपने हित में कभी भी राजनीतिक इस्तेमाल नहीं करना चाहा। साथ ही उन्होंने ऐलान भी किया कि वह आज आम आदमी पार्टी की सदस्यता से इस्तीफ़ा भी दे रहें हैं ताकि इसे लेकर आगे सवाल न उठें और आंदोलन को कोई नुकसान न पहुंचे।
इस मौके पर जिग्नेश मेवाणी ने मीडिया के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी पांच मिनट मिलने का समय मांगा, ताकि वह उनसे पूछ सकें कि वह इस आंदोलन की मांगों का समर्थन करते हैं या नहीं।

इससे पहले कार्यक्रम आयोजक वरिष्ठ पत्रकार-लेखक अनिल चमड़िया और प्रशांत टंडन ने भी अपनी बात रखी।
उन्होंने भी इस आंदोलन में व्यापक समाज की शिरकत का आह्वान किया।
Save

Save

Save