जिस जमात ने आजादी के संघर्ष का विरोध किया उसका सत्ता में आना गहरी चिंता का सबब- सच्चर
जिस जमात ने आजादी के संघर्ष का विरोध किया उसका सत्ता में आना गहरी चिंता का सबब- सच्चर
सार्वजनिक क्षेत्र और धारा 370 के लिए प्रतिबद्ध सोशलिस्ट पार्टी
शिक्षा, पानी, चुनाव सुधार और अल्पसंख्यकों की बेहतरी पर जनजागरण अभियान चलाएगी पार्टी
नई दिल्ली। सोशलिस्ट पार्टी के अध्यक्ष भाई वैद्य ने कहा है कि आरएसएस ने कारपोरेट और मीडिया को साथ लेकर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के सहारे यह चुनाव जीता है। यूपीए सरकार की नवउदारवादी नीतियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ अगर टिकाऊ तीसरे मोर्चे का गठन हो जाता तो भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं मिल पाता।
श्री वैद्य यहां सोशलिस्ट पार्टी की संपन्न दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में अधयक्षीय वक्तव्य दे रहे थे। उन्होंने कहा कि पैसा पानी की तरह बहाने के बावजूद भाजपा को केवल 31 प्रतिशत मतदाताओं ने अपना समर्थन दिया है।
भाई वैद्य ने कहा कि भाजपानीत एनडीए सरकार कांग्रेस की नवउदारवादी नीतियों को और तेजी से परवान चढाएगी तथा आरएसएस अपना संविधान और समाज विरोधी सांप्रदायिक अजेंडा थोपने की पूरी कोशिश करेगा। सरकार ने पहले दिन से ही नवउदारवादी और सांप्रदायिक अजेंडा लागू करना शुरू कर दिया है। इससे जनता की तकलीफें और ज्यादा बढेंगी। इस नए नवउदारवादी-सांप्रदायिक गठजोड का मुकागला करने के लिए उन्होंने सोशलिस्ट-कम्युनिस्ट एकता कायम करने का आहवान किया।
सोशलिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की दो-दिवसीय बैठक पार्टी अध्यक्ष भाई वैद्य की अध्यक्षता में दिल्ली में संपन्न हुई। बैठक में लोकसभा चुनाव के नतीजों की समीक्षा की गई, राजनीतिक-आर्थिक प्रस्ताव पारित किए गए और अगले पांच साल के लिए पार्टी का कार्यक्रम तय किया गया। बैठक में विभिन्न राज्यों से आए राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति के सदस्यों, राज्य इकाइयों के अध्यक्षों के अलावा विशेष आमंत्रित सदस्यों के रूप में डॉ जीजी पारिख, रविकिरण जैन, डॉ सुनीलम, श्याम गंभीर और अनिल नौरिया ने हिस्सा लिया। पार्टी के महासचिव डॉ. प्रेम सिंह ने सभी आगंतुकों का स्वागत किया।
पार्टी के वरिष्ठ सदस्य जस्टिस राजेंद्र सच्चर ने कहा कि जिस जमात ने आजादी के संघर्ष का विरोध किया और गांधी जी की हत्या की, उसका पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आना गहरी चिंता का सबब है। सोशलिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं को चाहिए कि वे आजादी और संविधान के मूल्यों तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती के लिए पूरे देश में जमीनी स्तर जुट कर काम करें। उन्होंने खास कर युवा कार्यकर्ताओं से कहा कि यह उनकी जिम्मेदारी बनती है कि वे नवउदारवादी नीतियों से तबाह जनता के बीच जाकर समझाएं कि निजीकरण के रहते शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी, बिजली जैसी उनकी मूलभूत जरूरतें कभी पूरी नहीं हो सकतीं।
बैठक में पारित प्रस्ताव में सोशलिस्ट पार्टी ने एक बार फिर पूर्ण रोजगार गारंटी कानून बनाने की मांग रखी। पार्टी ने सार्वजनिक क्षेत्र के पक्ष में अपनी प्रतिबद्धता जाहिर करते हुए रक्षा जैसे संवेदनशील विभाग में 100 प्रतिशत निजी/विदेशी निवेश के सरकार के फैसले का विरोध किया, क्योंकि रक्षा का सवाल देश की संप्रभुता और आजादी से जुडा हैा पार्टी ने पॉवर और रेलवे जैसे जनता की जरूरतों से जुड़े महत्वपूर्ण विभागों के निजीकरण और बाल्को तथा भेल जैसी कंपनियों के विनिवेशीकरण का भी विरोध किया।
सोशलिस्ट पार्टी ने प्रस्ताव में देश को आगाह किया है कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को एक होल्डिंग कंपनी के अंतर्गत लाने की जो बात सरकार कर रही है, उसके पीछे उसकी नीयत उन्हें निजी क्षेत्र को बेचने की हो सकती है।
प्रस्ताव में सोशलिस्ट पार्टी ने वर्तमान सरकार में मंत्री नजमा हेपतुल्ला के मुसलमानों को अल्पसंख्यक नहीं मानने के संविधान विरोधी बयान की कड़ी निंदा और विरोध किया है। पार्टी ने मंत्री के उस बयान का भी विरोध किया है जिसमें अल्पसंख्यकों के लिए पिछले तीन दशकों से जारी 15 सूत्री कार्यक्रम को बंद करने की बात की गई है। पार्टी ने मांग की है कि यह जरूरी कार्यक्रम सभी अल्पसंख्यक समुदायों के नुमाइंदों के साथ विचार-विमर्श करके और प्रभावी और मजबूत बनाया जाना चाहिए। प्रस्ताव में धारा 370 को समाप्त करने की सरकार की मंशा का कड़ा विरोध किया है। इरोम शर्मिला के सत्याग्रह का एक बार फिर समर्थन करते हुए अफस्पा को हटाने की मांग दोहराई गई है।
चुनाव सुधार पर पारित प्रस्ताव में मांग की गई है कि कारपोरेट घरानों द्वारा राजनीतिक पार्टियों को चुनाव के लिए धन देने पर रोक लगे। केवल उम्मीदवारों का ही नहीं, पार्टी के चुनाव खर्च का हिसाब भी मांगा जाए, उम्मीदवारों के लिए जमानत की राशि विधानसभा में दो हजार और संसद में पांच हजार रखी जाए, चुनाव का खर्च सीधे सरकार उठाए। मौजूदा मतदान प्रणाली के अनुसार 33 प्रतिशत वोट पाने वाली पार्टी को 60 प्रतिशत सीटें मिल जाती हैं और आठ-दस प्रतिशत वोट पाने वाली पार्टियों को एक भी सीट नहीं मिल पाती। सोशलिस्ट पार्टी ने मांग की है कि एक नई प्रणाली अपनाई जाए जिसके तहत मिलने वाले वोट के अनुपात में राजनीतिक पार्टियों को सीट मिलें। खास कर इलैक्टॉनिक मीडिया ने इस बार के लोकसभा चुनाव में बड़ी भूमिका निभाई है। यह आम धारणा है कि उसकी यह भूमिका तटस्थ और तथ्याधारित न होकर पक्षपातपूर्ण और भ्रम फैलाने वाली रही है। आगे ऐसा न हो, इलैक्ट्रॉनिक मीडिया के नियमन के लिए भारतीय प्रेस परिषद जैसी संस्था का गठन किया जाना चाहिए।
बैठक में फैसला किया गया कि सोशलिस्ट पार्टी शिक्षा और पानी के बाजारीकरण के खिलाफ, चुनाव सुधारों के पक्ष में और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा व बेहतरी के लिए अगले पांच सालों में जनजागरण अभियान चलाएगी।
सोशलिस्ट पार्टी का मानना है कि वैकल्पिक विकास के मॉडल का आधार गांधी और लोहिया का चिंतन हो सकता है। सोशलिस्ट पार्टी को भारत की ‘ग्रीन पार्टी’ के रूप में विकसित करने के विचार के तहत राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में ‘विकास और जलवायु परिवर्तन की समस्या’ पर एक विशेष सत्र आयोजित किया गया।
सत्र को प्रोफेसर सनत मोहंती, भारत डोगरा, संदीप पांडे और मोनिष बब्बर ने संबोधित किया।
एक विशेष सत्र लोक राजनीति मंच, जिसकी स्थापना 2009 के लोकसभा चुनाव के पहले की गई थी, के तत्वावधान में आयोजित किया गया जिसे रविकिरण जैन, शमशेर सिंह बिष्ट, कमला, मंजू मोहन, संदीप पांडे, डॉ. प्रेम सिंह समेत कई जनांदोलनकारियों व बुद्धिजीवियों ने संबोधित किया। चर्चा के बाद यह फैसला किया गया कि दरपेश राजनीतिक चुनौतियों के मद्देनजर लोक राजनीति मंच को ज्यादा सक्रिय और प्रभावी बनाया जाएगा।
सोशलिस्ट पार्टी दिल्ली की अध्यक्ष रेणु गंभीर ने सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद किया।


