जिस राष्ट्र में दलित और वंचित नहीं शामिल हैं, वह हमारा दुश्मन ही होगा!
जिस राष्ट्र में दलित और वंचित नहीं शामिल हैं, वह हमारा दुश्मन ही होगा!
समय रहते राष्ट्र को उनकी परिभाषा की कैद से निकाल लीजिए नहीं तो राष्ट्र दम घुटने के कारण मर जाएगा।
लोकतंत्र की परिभाषा प्रधानमंत्री के साथ सेल्फ़ी लेने वाले संपादकों से नहीं पूछिए
अगर आपके अंदर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रति ग़ुस्सा नहीं पैदा होता है तो इसका एक मतलब यह है कि आप सवर्ण होने के नाते मिलने वाली सहूलियतों को पाकर मगन हैं। इस संगठन ने रोहित पर मारपीट का झूठा आरोप लगाया जिसकी असलियत मेडिकल रिपोर्ट में सबके सामने आ गई। यही संगठन शीतल साठे के गीतों से चिढ़ता है।
शीतल साठे को महाराष्ट्र में इस संगठन ने बार-बार परेशान किया है। भाजपा इस संगठन का असली मातृदल है। शीतल साठे और उनके साथियों को 2013 में केवल इस वजह से जेल भिजवा दिया गया कि वे विधानसभा भवन के सामने जनता के गीत गा रहे थे। शीतल साठे को तो गर्भवती होने के कारण जमानत मिल गई लेकिन पिछले तीन साल से उनके तीन साथी जेल में बंद हैं। शीतल साठे अपने पति के जेल से भेजे गीत गाती हैं।
एक महिला पर हमला करने वाले संगठन में कितनी नैतिकता बची होगी यह मुझे आपको बताने की ज़रूरत नहीं है। समय रहते राष्ट्र को उनकी परिभाषा की कैद से निकाल लीजिए नहीं तो राष्ट्र दम घुटने के कारण मर जाएगा। जिस राष्ट्र में दलित और वंचित नहीं शामिल हैं, वह हमारा दुश्मन ही होगा।
#JusticeForRohith
लोकतंत्र की परिभाषा प्रधानमंत्री के साथ सेल्फ़ी लेने वाले संपादकों से नहीं पूछिए। इसकी परिभाषा उस लड़की से पूछिए जिसने पहले अपनी फ़ेलोशिप बंद करने का विरोध करने पर और बाद में रोहित वेमुला को आत्महत्या करने पर मजबूर करने वाले लोगों को सज़ा दिलाने की माँग करने के कारण पुलिस की लाठियाँ खाईं।
#OccupyUGC
#JusticeForRohith
सुयश सुप्रभ की फेसबुक टिप्पणियां साभार


