जुबानी जंग में टूट गई भाषा की जंजीर
जुबानी जंग में टूट गई भाषा की जंजीर
माई के लाल, गली के गुंडे और अन्य शब्दों का हुआ प्रयोग
योगेश श्रीवास्तव
लखनऊ। विधानसभा में माई के लाल और गली के गुंडे तो विधान परिषद में भड़वे। यह शब्द और भाषा आम प्रचलन में तो असंसदीय और आपत्तिजनक हैं लेकिन देश के सबसे बड़े सूबे की विधानसभा और विधान परिषद में गुरुवार को पक्ष-विपक्ष के सदस्यों ने एक-दूसरे को इन्हीं शब्दों से नवाजा। सदन के भीतर जुबानी जंग में भाषा की जंजीर टूट गई। हालांकि जिस विधानसभा में गालीगलौज, मारपीट हो चुकी हो और पुलिस दाखिल हो चुकी हो, ऐसे में इस तरह का आचरण आश्चर्यजनक नहीं लगता। यही नहीं, आस्तीनें चढ़ाकर सदन से बाहर एक-दूसरे को देख लेने की धमकियां या इशारे भी किसी नुक्कड़ के नजारे से कम नहीं रहा।
नियुक्तियों में भ्रष्टाचार को लेकर विधानसभा में जब सरकार पर आरोप लगे तो संसदीय कार्यममंत्री लालजी वर्मा ने संपूर्ण विपक्ष को चुनौती दे दी कि कोई माई का लाल यह साबित कर दे कि नियुक्तियों में भ्रष्टाचार हुआ तो वे जांच कराने को तैयार हैं। जवाब में विपक्ष के एक फायरब्रांड नेता ने सरकार के प्रभावशाली मंत्री को गली का गुंडा बता दिया। उधर विधान परिषद में नेता सदन स्वामी प्रसाद मौर्य ने सपा सदस्यों को भड़ुवा कह दिया। इस शब्द का इस्तेमाल उन्होंने उस सदन में किया जहां की सदस्य स्वयं मुख्यमंत्री मायावती हैं। जब उन्होंने यह सब कहा कि सदन में आधा दर्जन महिला सदस्य मौजूद थीं। लेकिन इसका उन्हें जरा भी मलाल नहीं हुआ। उनके इस आचरण पर सपा के सदस्य उत्तेजित हो गए। तल्खी के बीच जब जब विरोध दर्ज कराया गया तो नेता सदन ने खेद व्यक्त करने की बजाय सभापति से कहा कि दिखवा लिया जाए। उन्होंने कहा कि वे भड़ुवा शब्द को असंसदीय नहीं मानते इसलिए इस शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं। सदन में इस तरह की भाषा इस्तेमाल करने वाले मंत्रियों और विपक्ष के सदस्यों ने इस पर खेद व्यक्त करना जरूरी नहीं समझा। बल्कि दोनों ही पक्षों से अपनी कही बातों को सही साबित करने की होड़ रही। बात यहीं नहीं खत्म होती। अब तो विधानसभा में पक्ष विपक्ष केसदस्य एक-दूसरे को अश्लील इशारे भी करते हैं। सब देखते समझते हैं लेकिन जब सब इशारों में हो रहा है तो उसे कार्यवाही का हिस्सा कैसे बनाया जाए और जब कोई चीज कार्यवाही का हिस्सा नहीं सकती तो उस पर वाद-विवाद कैसे हो सकता है। हालांकि विधानसभा में सपा के वरिष्ठ सदस्य आजम खां ने इस बात को कहा भी कि सदन में इशारेबाजी बंद होनी चाहिए। सदन इशारों से नहीं चलेगा। मात्र पांच दिन चले विधानसभा के मानसून सत्र में पशुधन और दुग्ध विकास राज्यमंत्री अवधपाल सिंह यादव और सपा के बीच तनातनी इतनी रही कि इसी के साथ सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। सपा ने जहां अपने आरोपों में अवधपाल सिंह यादव को हत्यारा बताया तो जवाब में अवधपाल सिंह यादव ने भी सत्तारूढ़ दल का सदस्य और मंत्रिपरिषद का सदस्य होने के नाते सपा नेताओं और उसके सदस्यों पर तंज कसे।
साभार- डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट


