जेएनयू से पंगा भाजपा कंपनी की ऐतिहासिक भूल, इनकी बर्बादी का कारण बनेगी
जेएनयू से पंगा भाजपा कंपनी की ऐतिहासिक भूल, इनकी बर्बादी का कारण बनेगी
कोई भी जमीर वाला राष्ट्रभक्त भाजपा कंपनी में नहीं रह जाएगा
भाजपा कंपनी ने जेएनयू को टारगेट करने की हिम्मत कैसे कर ली?
भाजपा कंपनी से एक गलत राजनीतिक फैसला कैसे हो गया?
भाजपा कंपनी आरएसएस समूह के लिए जेएनयू हमेशा से सबसे असुविधाजनक केंद्र रहा है। कारण स्पष्ट है। जेएनयू हमेशा बौद्धिकता खुलेपन प्रगतिशीलता का केंद्र रहा। यहाँ के माहौल में ही तर्क है। इन्हें तो भेड़ियाधसान अंध बुद्धि वाले शिक्षा केंद्र चाहिए। तो जेएनयू को लेकर एक खुन्नस इन्हें हमेशा रही।
मई 2014 से स्थिति हो गई कि सैंय्या भये कोतवाल अब डर काहे का। अपने मुखपत्र पाञ्चजन्य organiser और आरएसएस बौद्धिकों द्वारा जेएनयू पर प्रहार शुरू कर दिए गए कि यह संस्थान देश विरुद्ध है इसे या तो सुधार दिया जाए या ख़त्म कर दिया जाए।
लेकिन इनसे जेएनयू को समझने में एक चूक हो गयी जो इन्हें बहुत भारी पड़ गयी।
इन्होंने सोचा की जेएनयू मार्क्सवादियों वामपंथियो का गढ़ भर है। अब कम्मुनिस्ट पार्टियों का तो कोई भविष्य बचा नहीं और ये कमजोर हो चुके हैं। इनका देश में कोई नाम लेने वाला बचा नहीं है तो इनपर प्रहार कर इनका सबसे मजबूत किला भी नेस्तनाबूत कर दिया जाए। मिडिया को अपनी और मिला के जेएनयू को राष्ट्र विरोधी साबित कर दिया जाए और देश भर में इन्हें कहीं सहानुभूति नहीं मिलेगी क्योंकि कम्युनिस्टों से तो सब चिढ़ते ही हैं। इनका जेनयू के बारे में यही आकलन गलत पड़ गया।
असलियत यह है कि जेएनयू प्रगतिशीलता तर्कवाद खुलेपन और भारतीय संस्कृति के सभी सकारात्मक लक्षणों को संजोये समेटे एक विश्व विख्यात विश्विद्यालय है। यह दुनिया में देश की शान है। यहां वामपंथ ही नहीं सभी विचारों के विश्व स्तरीय ज्ञाता हैं और पूरे लोकतांत्रिक माहौल में सभी क्षेत्रों में नित नए ज्ञान के वाहक लोग हैं जो विभिन्न क्षेत्रों में देश समाज व मानवता की सेवा दशकों से कर रहे हैं।
असलियत यह भी है कि कम्युनिस्ट पार्टियां भले ही चुनावी राजनीति व राजनीतिक रणनीतियों में अपनी भूलों के चलते कमजोर हो गयी हैं लेकिन वामपंथी सोच अपने विभिन्न आयामों के साथ भारतीय समाज चिंतन में उसी तरह घुल मिल गई है जैसे भोजन में नमक। कोई भले ही नमक की टिकिया खाली मुंह में डाल के न चूसना चाहे पर वामपंथी नमक के बिना समाज राजनीतिक समाज रूपी भोजन बेस्वाद ही होगा। क्योंकि अभी भी वामपंथी सोच कम्युनिस्ट पार्टियों से परे जाकर मानवता प्रगतिशीलता pro poor orientation के सबसे टिकाऊ उपक्रम के रूप में भारत में रची बसी है।
तो जब इन्होंने जेएनयू पर अटैक किया तो देश भर में सभी लोग इनके खतरनाक अजेंडे के प्रति चौंकन्ने हो गए क्योंकि नमक तो सब खाते हैं ना।
भाजपा कंपनी से यह ऐतिहासिक भूल हो गयी और इनकी बर्बादी का कारण बनेगी।
पहले ही कहा था जेएनयू हलुआ नहीं है। दांत टूट जाएंगे तुम्हारे। और इनके दांत दरकने शुरू हो भी चुके हैं।
आने वाले समय में कोई भी जमीर वाला राष्ट्रभक्त भाजपा कंपनी में नहीं रह जाएगा। इनके पास बचेंगे बस मुट्ठी भर आरएसएस कार्यकर्ता और कुछ गुंडे मवाली टाइप लोग।


