जो वैकल्पिक सिनेमा है वही भविष्य का सिनेमा है
जो वैकल्पिक सिनेमा है वही भविष्य का सिनेमा है
कवि नवारुण भट्टाचार्य के जीवन और कविता पर फिल्म का प्रदर्शन हुआ
पटना। यहां आयोजित छठे पटना फिल्मोत्सव प्रतिरोध का सिनेमा में फिल्मोत्सव का आकर्षण क्रांतिकारी कवि नवारुण भट्टाचार्य के जीवन और कविता पर पावेल द्वारा निर्देशित फिल्म ‘ए मृत्युउपत्यका जार देश ना’ भी थी। यह इस फिल्म का भारतीय प्रीमियर था।
इस फिल्म से पहले प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए पावेल ने कहा कि नवारुण से उनका ताल्लुक छात्र जीवन से ही हो गया था। नंदीग्राम और सिंगूर में जो जनता का आंदोलन था, उसके साथ नवारुण ने उन्हें जोड़ा। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने नवारुण के अंतिम कविता संग्रह ‘बुलेटप्रूफ कविता’ का डिजाइन और प्रकाशन किया। उन्होंने कहा कि नवारुण को उनके पिता ने कहा था कि लेखक बनना पर पैसे के लिए मत लिखना। आज जो कारपोरेट पूंजी 200 फिल्में बना रही हैं, उसकी तुलना में 20 फिल्में भी अगर वैकल्पिक या प्रतिरोधी फिल्मकारों की ओर से बनाई जाई तो उनका मुकाबला किया जा सकता है।
पावेल ने कहा कि नवारुण का धनी प्रकाशकों से हमेशा टकराव रहा, उन्होंने पद-प्रतिष्ठा को भी ठुकराया, लेकिन उनकी किताबें इतनी पढ़ी जाती थीं कि एक दौर में आनंद बाजार पत्रिका अखबार उनके उद्धरण छापने लगा था, क्योंकि वे उसे अपनी रचनाएं नहीं देते थे। पावेल ने कहा कि जो वैकल्पिक सिनेमा है वही भविष्य का सिनेमा है। जो क्षेत्रीय सिनेमा है, वह भी घाटे में जा रहा है, क्योंकि वह मुंबइया फिल्मों का वल्गर संस्करण होकर रह गया है।
साभार – इस बार


