#झाबुआ विस्फोट मध्यप्रदेश प्रशासन की लापरवाही का नतीजाः एसडीपीआई
#झाबुआ विस्फोट मध्यप्रदेश प्रशासन की लापरवाही का नतीजाः एसडीपीआई
झाबुआ विस्फोट मध्यप्रदेश प्रशासन की लापरवाही का नतीजाः एसडीपीआई
नई दिल्ली। सोशल डेमोक्रटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) ने भाजपा शासित मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के पेटलावाद में हुए धमाके में मारे गए 100 से अधिक निर्दोष लोगों की मौत पर गहरा दुख प्रकट किया है। गौरतलब है कि 12 सितंबर को हुआ यह भयानक धमाका गैस सिंलेंडर की वजह से नहीं बल्कि जिलेटिन की छड़ों और भारी मात्रा में अवैध रूप से इकट्ठा किए गए विस्फोटक के स्थानीय बाज़ार में फटने से हुआ था। पार्टी का मामना है इतने भीड़ भरे बाज़ार में इतनी भारी मात्रा में विस्फोटकों के इकटठा करना ही एक आपराधिक लापरवाही है।
इस मामले में एसडीपीआई के राष्ट्रीय महासचिव अफसर पाशा ने अपने एक बयान में कहा कि मध्यप्रदेश आंतकी गतिविधियों का गढ़ बनकर रह गया है जहां कथित तौर पर पहले भी आंतकियों को साजि़श कर प्रशिक्षण दिए गए थे, जिसमें हिन्दुत्वादी आंतकवादियों जैसे साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, स्वामी असीमानंद, कर्नल पुरोहित और अन्य लोगों ने आतंकी घटनाओं को अंजाम दिया और इसे मुस्लिमों पर डालने की कोशिश की गई। हालांकि इस बार शक की सुई बिना किसी शक के फरारशुदा राजेन्द्र कसावा की ओर गई जोकि इस मामले में वांछित है और पिछले तीन दशकों से उसे पेट्रोलियम एव विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) से विस्फोटक इकटठा करने का लाईसेंस मिला हुआ है जोकि पुलिस की निगरानी में अवैध तौर पर तस्करी कर रहा था।
महासचिव पाशा साहब ने सवाल उठाते हुए कहा कि अखिर पुलिस पिछले 35 सालों से राजेन्द्र कासवा की किस तरह निगरानी कर रही थी, क्या वो इस तरह के किसी हादसे का इंतज़ार कर रही थी कासवा के खिलाफ ठोस सबूत हासिल करने के लिए? इस बात से यह साबित होता है कि राजनैतिक और सुरक्षा एजेंसियों का हाथ उस पर था। राजेन्द्र कासवा अपने को भाजपा का एक कार्यकर्ता और आरएसएस का सदस्य बताता है। इस मामले की तह तक जाने के लिए एनआईए और एटीएस के ज़रिए गहराई से जांच की जाने की बेहद ज़रूरत है। ताकि देश में व्याप्त हिन्दुत्व के आंतक पर काबू पाया जा सके। जिसकी निष्पक्ष जांच देश की अमन व शांति के लिए बेहद ज़रूरी है।


