समग्र भूमि उपयोग नीति के लिए 9-10 अगस्त को दिल्ली में होगा प्रदर्शन!

शाहजहांपुर का दौरा करेगी आइपीएफ की टीम!

प्रोफेसर कमर जहां आइपीएफ उप्र इकाई की अध्यक्ष चुनी गयीं!

आइपीएफ राज्य ईकाई की बैठक हुई सम्पन्न!

लखनऊ 15 जून, 2015। भूमि अधिग्रहण अध्यादेश (Land acquisition ordinance) को वापस लेने और समग्र भूमि उपयोग नीति के लिए राष्ट्रीय आयोग के गठन की मांग पर आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ) आगामी 9 अगस्त को दिल्ली में धरना-उपवास करेगा और 10 अगस्त को ‘स्वराज अभियान’ के साथ संसद मार्च करेगा और पत्रकार जगेन्द्र की हत्या के सवाल पर आइपीएफ के राष्ट्रीय प्रवक्ता एस. आर. दारापुरी के नेतृत्व में एक जांचदल शाहजहांपुर का जल्द ही दौरा करेगा।

यह निर्णय आज लखनऊ में सम्पन्न आइपीएफ की प्रदेश ईकाई की बैठक में लिया गया।

बैठक में प्रसिद्ध लेखिका और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग की पूर्व अध्यक्ष प्रो. क़मर जहां को प्रदेश अध्यक्ष, राम दास कुरील को उपाध्यक्ष और सामाजिक कार्यकर्ता नसीम खान को प्रदेश सचिव चुना गया।

Modi's slogan of development is false

बैठक में मौजूद आइपीएफ के राष्ट्रीय संयोजक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि भूमि अधिग्रहण कानून दरअसल किसानों को जमीन से बेदखल करने का कानून है। मोदी का विकास का नारा झूठा है क्योंकि विदेश से कोई भी पूंजी उत्पादन के क्षेत्र में नहीं आ रही है। पिछले एक वर्ष के आकंड़े इसी सच्चाई को दिखाते हैं। रोजगार देने का नारा भी झूठा है क्योंकि भारत में कृषि, कुटीर लघु उद्योग का क्षेत्र ही वास्तव में सबसे ज्यादा रोजगार देता है जिसे यह सरकार बर्बाद करने में लगी है। यह कहना भी गलत है कि सड़क, रेल, खनन, दूरसंचार, विद्युत योजनाओं आदि के लिए कानून और अध्यादेश लाना जरुरी है क्योंकि इन सभी क्षेत्रों के लिए 13 कानून देश में पहले से ही मौजूद है। इसलिए उन्होंने देश की जनता से मोदी सरकार के झांसे में न आने की अपील की।

अखिलेन्द्र ने कहा कि महंगाईं, काला धन वापस लाने, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर घिर रही मोदी सरकार लगातार बढ़ रहे जनविक्षोभ से ध्यान हटाने के लिए मंदिर जैसे सांप्रदायिक मुद्दों को हवा दे रही है। नागालैण्ड में सैनिक कार्रवाई के बहाने पाकिस्तान समेत पड़ोसी देशों के खिलाफ अनावश्यक किस्म की बयानबाजी व युद्धोन्माद फैलाया जा रहा है। उन्होंने कहा सुषमा स्वराज द्वारा भ्रष्टाचार के बड़े आरोपी ललित मोदी की मदद करने की बात सामने आने से इस सरकार की साफ-सुथरी व भ्रष्टाचारमुक्त भारत के दावे की भी पोल खुल गयी हैं। संघ-भाजपा द्वारा खुलेआम बेशर्मी से सुषमा स्वराज का बचाव यह साबित करता है कि भ्रष्ट-मुनाफाखोर कार्पोरेट की मदद के लिए वे कितने लालायित हैं।

बैठक में लिए राजनीतिक प्रस्ताव में उप्र में ध्वस्त हो गयी कानून व्यवस्था के खिलाफ कानून के राज की स्थापना के लिए आंदोलन खड़ा करने का निर्णय हुआ। इस सम्बंध में आईपीएफ नेताओं के नेतृत्व में शाहजहांपुर, गोरखपुर, बहराइच आदि में जांच टीमें जाकर उत्पीड़न की घटनाओं की जांच-पड़ताल (Investigation of incidents of harassment in Uttar Pradesh) करेंगी।