डॉ. ब्रह्मदेव शर्मा की प्रथम पुण्यतिथि पर...
डॉ. ब्रह्मदेव शर्मा की याद और बुनियाद!
मेधा पाटकर व एनएपीएम के अन्य साथी
डॉ. ब्रह्मदेव शर्माजी एक ऐसे शख्स का नाम था, जिसे करीब से उनके कार्य तथा कार्यप्रणाली को जानने वाले भूल नहीं सकते हैं। जबकि उन्हें शासन (म.प्र. या केंद्र) ने विदाई तक नहीं दी।
उनकी व्यवस्था परिवर्तन, संविधान सम्मान तथा आदिवासी, दलित, किसान-मजदूरों के प्रति कानूनी व न्यायपूर्ण हर कदम पीढ़ियों तक कहीं ना कहीं दस्तक देता रहेगा।
डॉ. ब्रह्मदेव शर्मा वैकल्पिक विकास के चिन्तक तो थे ही, किन्तु पंचायती राज और अनुसूचित क्षेत्रों के लिए नया परिपेक्ष्य व आयाम कई गुना अधिक उभारे गये और ‘पेसा’ ही नहीं, वनाधिकार कानून में भी हस्तक्षेप उनके विचारों व लेखन से प्रतिबिंबित हुआ।

ब्रह्मदेव जी की किसानी पर, शराबबंदी पर, कर्जदारी व कर्जमुक्ति पर अभूत, रचनात्मक एवम संघर्ष-राजनीति के साथ की सोच, हम जन-आंदोलनों को आगे की दिशा, मार्गदर्शन के लिए बेहद प्रभावकारी रहे।
उनकी गांधीवाद से संविधान तक की पकड़, उनके अर्थशास्त्रीय तथा वैज्ञानिक अध्ययन के साथ, धरातल से सतत जुड़ाव की परिणति थी।
वे बस्तर में, कैमूर में, नर्मदा में, वैसे ही संत तुकाजी महाराज की अडियार टेकड़ी पर वहाँ की संस्कृति, प्रकृति में गूंथे रहते थे और फिर कुछ नयी खोज अपने लेखन द्वारा समाज के सामने ले आते थे।
डॉक्टर साहब की संवेदना व लेखन से उभरी विचारधारा जन-आंदोलनों के समन्वय की बुनियाद, आगे भी बनी रह सकती है। उन्हें श्रद्धांजलि!
DR. Brahma Dev Sharma was thinker of alternative development