चिंतकों पर हमला या उनकी हत्याओं को किसी भी आधार पर जायज नहीं ठहराया जा सकता- डॉ. मनमोहन सिंह
असहिष्णुता पर मनमोहन का हमला

मुक्त बाजार स्वतंत्रता के बिना संभव नहीं
नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि देश विचार, विश्वास और बोलने की आजादी के 'घोर हनन' से बेहद चिंतित है और इससे जुड़ी घटनाएं 'देश पर प्रहार' की तरह हैं।

डॉ. मनमोहन सिंह, पंडित जवाहर लाल नेहरू की 125वीं जयंती पर नेशनल कान्फ्रेंस के कार्यक्रम 'नो पीस विदआउट फ्रीडम। नो फ्रीडम विदाउट पीस : सेक्योरिंग नेहरूज विजन एंड इंडियन फ्यूचर' के उद्घाटन सत्र में अपने उद्गार व्यक्त कर रहे थे।

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, "मतभिन्नता की वजह से चिंतकों पर हमला या उनकी हत्याओं को किसी भी आधार पर जायज नहीं ठहराया जा सकता। सही सोच रखने वाले हर व्यक्ति ने इस तरह की घटनाओं की कड़े से कड़े शब्दों में निंदा की है। यह देश पर हमला है।"

श्री सिंह ने कहा, "देश हाल में कुछ हिंसक चरमपंथी समूहों द्वारा विचार, विश्वास और बोलने की आजादी के घोर हनन से बेहद चिंतित है।"

उन्होंने चेताया कि बढ़ती असहिष्णुता के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान असंतोष की आवाज को दबाना देश के आर्थिक विकास के लिए खतरनाक साबित होगा। साथ ही कहा, "मुक्त बाजार स्वतंत्रता के बिना संभव नहीं है।"