अरविन्द विद्रोही
बाराबंकी। हर जिले में तैनात एक मिनी मुख्यमंत्री 2007 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के पतन का कारण बन चुके हैं, लेकिन लगता नहीं है कि सपा ने अतीत की गल्तियों से कुछ सबक सीखा हो। सपा के यह मिनी मुख्यमंत्री फिर से जनता के लिए बड़ी मुसीबत बनते जा रहे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार उत्तर-प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के अति करीबी के रूप में प्रचारित एक युवा सपा नेता राजेश यादव उर्फ़ राजू की दबंगई से पीड़ित बाराबंकी के कुर्सी विधानसभा के समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता किशन यादव के परिवार ने इस बार दीपावली नहीं मनाई। न्याय की आस में किशन यादव सपा नेताओं के घर के प्रतिदिन चक्कर लगा रहे हैं, वह वरिष्ठ मंत्री शिवपाल यादव को भी अपना दुःख भरा प्रार्थना पत्र सौंपा चुके हैं। इसके अलावा किशन यादव बाराबंकी जिला अध्यक्ष मौलाना मेराज, पूर्व विधान परिषद् सदस्य अरविन्द यादव, विधायक सदर सुरेश यादव, विधायक कुर्सी व राज्य मंत्री फरीद महफूज़ किदवई, राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार अरविन्द सिंह गोप से भी अपना दुखड़ा रो चुके हैं। बताया जाता है कि बीते दिवस सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव दिन भर लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय पर बैठे रहे और तमाम लोगों से मुलाकात करी। प्राप्त जानकारी के अनुसार बाराबंकी के ग्राम निगोहां विधान सभा कुर्सी निवासी पीड़ित किशन यादव ने सपा मुखिया को भी अपने ऊपर ढाये गए अत्याचार-नाइंसाफी के दस्तावेज सौंपे।

सवाल यह उठता है कि आखिर किशन यादव की शिकायत क्या है ? और जिस सपा नेता राजेश यादव उर्फ़ राजू पर तमाम गम्भीर आरोप किशन यादव ने अपने शिकायती पत्र में लगाये हैं उनकी सच्चाई क्या है ? राजनैतिक तौर पर क्या वास्तव में राजेश यादव उर्फ़ राजू की हैसियत बाराबंकी जनपद के सपा जिला अध्यक्ष मौलाना मेराज, इलाकाई विधायक फरीद महफूज किदवई (राज्यमंत्री), अरविन्द सिंह गोप (राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार ) आदि से अधिक है ? क्या मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बगलगीर होने, उनके खासम -खास होने का दावा करने वाले राजेश यादव उर्फ़ राजू को माननीय न्यायालय के आदेश के अवहेलना और स्थानीय प्रशासन को अर्दब में लेने का कोई विशेषाधिकार मुख्यमंत्री की तरफ से निर्गत किया गया है ? तमाम अनुत्तरित सवाल कौंधते हैं जब कोई भी सत्ता का चहेता किसी आम जन के हक़ का लुटेरा बनकर सत्ता मद में चूर होकर अपना ताण्डव करता है। राजेश यादव उर्फ़ राजू के आधा दर्जन स्थानीय सहयोगियों ने वर्षों से आम ग्रामीण जनता के भीतर राजू और अखिलेश यादव की नजदीकियों के किस्से-कहानियाँ सुनाकर, तमाम राजनैतिक कार्यक्रमों के अवसर पर खींची गई तस्वीरों को दिखाकर यह पुख्ता कर दिया था कि राजू की हर बात अखिलेश यादव मानेंगे। विगत विधानसभा चुनाव 2012 में चंद घंटों के लिए बाराबंकी सदर से सपा का प्रत्याशी भी राजू यादव को बनाया गया, बाराबंकी के सपाइयों ने उसी दिन जाना कि राजेश यादव उर्फ़ राजू नामक कोई शख्स है जो अखिलेश यादव का अति करीबी और प्रिय पात्र है। टिकट कटने के पश्चात् राजू यादव को समाजवादी युवजन सभा के बाराबंकी जनपद अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी गई लेकिन पार्टी सूत्रों के अनुसार जनपद की मासिक बैठकों में अधिकतर गायब रहने वाले राजेश यादव उर्फ़ राजू सभी से यही बताते हैं कि मैं भैया जी के साथ था, भाभी के साथ था, चाचा ने बुलाया है या धर्मेन्द्र भैया के साथ हूँ। आलाकमान से नजदीकियों का प्रमाण वो एक दिन का विधानसभा टिकट इस कदर बाराबंकी के सभी सपा नेताओं के मस्तिष्क पर हावी है कि कोई भी नेता/ मंत्री इससे सवाल-जवाब नहीं करता है। यह है मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के अति करीबी उनकी तथाकथित कोर कमेटी के सदस्य राजेश यादव उर्फ़ राजू के राजनैतिक ताकत का सच।

अब आते हैं किशन यादव के शिकायती पत्र के मजमून पर- जिसमें साफ तौर पर लिखा है कि राजेश यादव उर्फ राजू ग्राम बौहय्या पोस्ट- थाना कुर्सी विधानसभा कुर्सी, जो कि खुद को मिनी मुख्यमंत्री कहते हैं कि प्रताड़ना से मजबूर होकर किशन यादव शिकायत कर रहे हैं। अपने पत्र में अपनी भूमि के मसले के अलावा कई घटनाओं का जिक्र किया है जिसमें राजेश यादव उर्फ़ राजू ने अपनी सत्ता के गलियारों में पकड़ के बूते इलाके में अपनी हनक दिखायी है। बताया जाता है कि छेड़खानी, मारपीट, भूमि कब्ज़ा करने के प्रकरण में राजेश यादव उर्फ़ राजू की सीधी संलिप्तता होने की बात लिखित तौर पर निगोहां निवासी किशन यादव ने की है। किशन यादव के अनुसार- 17 अक्टूबर को सुबह 7 बजकर 40 मिनट पर राजेश यादव उर्फ़ राजू ने फ़ोन पर धमकी दी और कहा कि मैं मुख्यमंत्री के साथ हूँ इस समय, शाम को आने पर तुमको सबक सिखाऊंगा, तब से अपना गाँव-घर छोड़कर मैं इधर-उधर रह रहा हूँ । किशन यादव की जिस भूमि पर राजेश यादव उर्फ़ राजू के रिश्तेदार राजू की सरपरस्ती में जबरन निर्माण कार्य करवा रहे हैं उस भूमि पर स्थगनादेश भी है लेकिन सत्ता की हनक-धमक के चलते पुलिस प्रशासन भी खामोश है। राजेश यादव उर्फ़ राजू की दबंगई व आतंक के शिकार किशन यादव ने जिला अधिकारी बाराबंकी,पुलिस अधीक्षक बाराबंकी, आयुक्त फैज़ाबाद मंडल, मुख्यमंत्री-प्रदेश को अपना शिकायती पत्र पूर्व में ही प्रेषित कर दिया है जिसमें न्याय की अपील के साथ साथ न्याय ना मिलने की दशा में 11 नवम्बर से आमरण अनशन करने की बात भी लिखी है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को अपनी राजनैतिक छवि की बेहतरी के लिए इस प्रकरण को संज्ञान में लेकर उचित कार्यवाही करते हुए ऐसे नाम ख़राब करने वाले लोगों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने में तनिक भी देर या संकोच नहीं करना चाहिए। देखते हैं कि क्या किशन यादव की दास्तान की कोई सुनवाई समाजवादी पार्टी या सरकार के जिम्मेदार करते भी हैं अथवा नहीं ?