जनादेश न्यूज़ नेटवर्क
चेन्नई। लगभग नब्बे फीसदी लोकसभा सीटों पर एक-दूसरे का सामना करने वाली द्रविड़ पार्टियों को तमिलनाडु में भाजपा नीत तीसरे मोर्चे को हल्के हाथ नहीं लेना चाहिए। यह चुनाव डीएमके बनाम एआईएडीएमके के रूप में देखा जा रहा है। लेकिन भाजपा व सहयोगी दल उलटफेर करने की स्थिति में है। द्रविड़ दलों की समस्या यह भी है कि इस मोर्चे के अलावा भी उसे कांग्रेस व वामदलों के प्रत्याशियों का सामना करना पड़ेगा।
भाजपा नीत गठबंधन में सबसे ज्यादा दल है। चार दलों के साथ डीएमके दूसरा बड़ा गठबंधन है। कांग्रेस, वामदल और एआईएडीएमके अकेले चुनाव लड़ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक ज्ञानी की मानें तो इन सभी पार्टियों का वोट बैंक है। भाजपा, डीएमडीके और कांग्रेस के मतदाता भी राज्यभर में मिल जाएंगे। आम आदमी पार्टी के प्रवेश से यह चुनाव काफी रोचक होगा जिसमें मतों का बिखराव अहम साबित होगा। डीएमके और एआईएडीएमके की जीत आसान नहीं होगी। कुछ सीटों पर इनको निराशा भी हाथ लग सकती है।
2009 के लोकसभा चुनाव में डीएमडीके और भाजपा ने अकेले चुनाव लड़ा था। कन्याकुमारी में भाजपा प्रत्याशी दूसरे नम्बर पर रहा था। दोनों पार्टियों के मतों का योग किया जाएगा तो यह 26 लोकसभा सीटों की जीत के अंतर से ज्यादा था। आठ सीटों पर डीएमडीके प्रत्याशियों ने एक लाख से ज्यादा वोट हासिल किए। एमडीएमके के वाइको को विरुदनगर में मिली हार की वजह भी डीएमडीके के प्रत्याशी माफोई पांडियराजन को कहा जा सकता है। जिनको करीब डेढ़ लाख मत मिले थे। भाजपा के दो प्रत्याशी भी यह कमाल कर पाए थे। दोनों के मत मिलाकर साढ़े बारह प्रतिशत रहे।
ऐसे में एमडीएमके और पीएमके के जुडऩे से भाजपा को अतिरिक्त फायदा होने का अनुमान है। एक अन्य चुनाव विश्लेषक वेंकटेशन आत्रेय मानते हैं कि जिस पार्टी के समर्पित वोटर ज्यादा होंगे उसे ही फायदा होगा। देखा जाए मतदाताओं का पचास फीसदी हिस्सा डीएमके और एआईएडीएमके के पास है। इसलिए इन दोनों में ही मुख्य प्रतियोगिता रहेगी। लेकिन कुछ निर्वाचन क्षेत्र में अन्य राजनीतिक दलों की प्रबल संभावनाएं है।
गठबंधन पर एक नजर
कांग्रेस
वामदल
एआईएडीएमके
डीएमके, वीसीके, पीटी, आईयूएमएल व एमएमके
भाजपा, पीएमके, डीएमडीके, एमडीएमके, आईजेके और कोंगुनाड पार्टी