ताजमहल को बचाने और यमुना में प्रदूषण कम करने में मदद को आगरा में सीवरेज परियोजनाओं को मंजूरी

एनएमसीजी ने ताजमहल को बचाने और यमुना में प्रदूषण कम करने में मदद के लिए आगरा में संयुक्त सीवरेज परियोजनाओं को मंजूरी दी

उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और हिमाचल प्रदेश में 1573.28 करोड़ रुपये की नमामि गंगे परियोजनाओं को मंजूरी

Approval of sewerage projects in Agra to help save Taj Mahal and reduce pollution in Yamuna

नई दिल्ली, 22 नवंबर। जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय अंतर्गत राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) की कार्यकारी समिति ने 1573.28 करोड़ रुपये की दस परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है।

एक सरकारी विज्ञप्ति के मुताबिक केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण, सड़क परिवहन और राजमार्ग तथा नौवहन मंत्री नितिन गडकरी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में हुई एक बैठक में, यह फैसला किया गया है कि आगरा में यमुना में प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए एक विस्तृत समाधान ढूंढने की आवश्यकता है। ओऔरएम व्यय सहित 857.26 करोड़ रुपये के कुल खर्च के साथ 15 वर्ष की अवधि में आगरा सीवरेज योजना (रोकना और पंथातरण कार्यों) की पुनर्सुधार/नवीनीकरण परियोजना की कल्पना की गई।

इस परियोजना के प्रमुख घटकों में 61 नालों की निकासी, 166 एमएलडी की कुल क्षमता वाले 3 सीवरेज शोधन संयंत्र (एसटीपी), 9.38 एमएलडी के 10 विकेन्द्रीकृत एसटीपी का निर्माण और 2 वर्तमान एसटीपी का आधुनिकीकरण, रोकने के कार्य में सुधार, एसटीपी का उन्नयन (क्लोरीन डालने के लिए) और 15 वर्ष के लिए संचालन और रख-रखाव शामिल हैं। उम्मीद है कि इन परियोजनाओं से आगरा शहर से यमुना नदी में होने वाले प्रदूषण के स्तर को कम किया जा सकेगा, ताजमहल को बचाने में मदद मिलेगी और नदी के जल की गुणवत्ता और क्षेत्र के कुल सौंदर्य में सुधार होगा।

कार्यकारी समिति ने 73.73 करोड़ रुपये की लागत से रोकना और पंथातरण कार्यों (आईऔरडी) तथा कासगंज में सीवेज शोधन संयंत्र को भी मंजूरी दे दी। इस परियोजना में 2 आईऔरडी ढांचों, 2.8 किलोमीटर की लम्बाई तक नेटवर्क बिछाने और 15 एमएलडी क्षमता की एसटीपी का निर्माण शामिल हैं। परियोजना की लागत में 15 वर्ष के लिए ओऔरएम शामिल है। इस समय कासगंज में सीवरेज की कोई व्यवस्था नहीं है, बेकार पानी खुले नालों में चला जाता है जो अंत में काली नदी में गिरकर नदी में प्रदूषण फैलाता है। इस परियोजना के अंतर्गत काली नदी में गिरने वाले सभी नालों की निकासी की व्यवस्था की जाएगी और बेकार पानी को पम्पपिंग/गुरुत्वाकर्षण प्रवाह के जरिए शोधन के लिए प्रस्तावित एसटीपी में डाल दिया जाएगा।

कार्यकारी समिति ने उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में कुल 64.76 करोड़ रुपये और 15 वर्ष के लिए ओऔरएम व्यय वाली परियोजना को भी मंजूरी दी। इसमें 7 एमएलडी के नए एसटीपी का निर्माण, वर्तमान 5 एमएलडी डब्ल्यूएसपी का उन्नयन करके 10 एमएलडी करना है।

सुल्तानपुर - गोमती नदी में गिरते हैं 6 नाले

Sultanpur-6 nallahs falls into Gomti river

सुल्तानपुर गोमती नदी के किनारे बसा हुआ है और शहर का कचरा 6 नालों के जरिए निकलता है। ये नाले गोमती नदी में गिरते हैं जिसके परिणामस्वरूप नदी में प्रदूषण होता है। अतः यह आवश्यक है कि नालों को रोका जाए/उनका रास्ता बदला जाए, सीवेज/कीचड़ का शोधन हो और गोमती नदी में स्वीकार्य स्तर तक धार छोड़ी जाए।

बिहार में भी गंगा नदी में प्रदूषण को कम करने की परियोजना

Project of reducing pollution in Ganga river in Bihar also

समिति ने बिहार में छपरा, फतूहा, बख्तियारपुर और खगड़िया में 328.52 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की मंजूरी दी। फतूहा में 35.49 करोड़ रुपये, बख्तियारपुर में 35.88 करोड़ रुपये और खगड़िया में 21 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इससे गंगा नदी में प्रदूषण को कम किया जा सकेगा। खगड़िया में यह परिकल्पना की गई है कि एसटीपी से शोधित जल का इस्तेमाल शहर में एक जलाशय विकसित करने के लिए किया जाएगा।

वर्द्धमान जिला भी बढ़ाता है गंगा में प्रदूषण

Vardhaman district also enhances pollution in Ganga

वर्द्धमान नगर निगम के अंतर्गत पम्पपिंग स्टेशन और एसटीपी सहित पश्चिम बंगाल में 234.31 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दे दी गई है। वर्द्धमान जिला गंगा नदीं के किनारे स्थित नहीं है फिर भी इस शहर का अशोधित खराब पानी बांका नदी के रास्ते गंगा नदी में प्रदूषण फैलाने में योगदान देता है। शहर में कोई केन्द्रीय सीवरेज प्रणाली नहीं है और उसे वर्तमान में स्वच्छता संबंधी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

पोंटा साहिब शहर में सीवरेज योजना को मंजूरी

Approval of Sewerage Scheme in Ponta Sahib City

हिमाचल प्रदेश के पोंटा शहर के मंडल-II और III के लिए 11.57 करोड़ रुपये की सीवरेज योजना को मंजूरी दी गई। पोंटा शहर यमुना नदी के तट पर स्थित है। यह नदी हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड राज्यों के बीच सीमा है। पोंटा साहिब शहर 11 वार्डों में विभाजित है। इस योजना की तीन मंडलों में परिकल्पना की गई है।

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