ताजा बासी खाना देश की राजनीति ही नहीं मन और मानसिकता भी ताजा बासी खाना हो गया है । यह सब कुछ बहुत सारी वजहों

से हुआ । बहुत सारी वजहों की तलाश करेंगे तो वजहों तक तो नहीं ही पहुंच पाएंगे – हो सकता है कि चुनाव पूर्व और चुनाव बाद के विश्लेषक हो जाएं । यह बिरादरी ताजा बासी खाना खाने और खिलाने में माहिर होते हैं । और क्यों न हों करोड़ों का धंधा है । खैर इस बिरादरी का लग गया तो तीर ,नहीं तो तुक्का , बिहार के मामले में 24 नवंबर को सामने आ जाएगा । उसके बाद भी , जब ताजा खाना सामने होगा – यह बिरादरी साबित करती रहेगी कि अभी भी बढ़िया होता है ताजा बासी खाना । यह अच्छा नहीं लगता कि बिरादरी ने मुझे बिरादरी का नहीं माना है । फिर भी बिरादरी के गुण गाए जाता हूं । अब यह कहना तो उचित नहीं है कि कांग्रेसियों के समान प्रधानमंत्री के ही गुण गाता हूं । या भ्रामक जनता पार्टी के समान कर्नाटक का मुख्य मंत्री येदिरुप्पा को बनाए – बचाए – हटाए जाने के लिए भ्रामकता के गुण गाता हूं । जहां भी जाता हूं खाता हूं बासी ताजा खाना । अब आप इसे नहीं मानेंगे कि बासी ताजा खाना , हमारे देश की परंपरा भी है और प्रक्रिया भी । इस परंपरा और प्रक्रिया को सरकारी स्तर पर कार्य़ प्रक्रिया संचालन नियमावली भी कहा जाता है । इसी से तो जन्मा है लालफीताशाही या कहना कि ममाला ठंडे बस्ते में चला गया । दरअसल यह लालफीताशाही या ठंडा बस्ता भी कुछ नहीं होता । यह तो रास्ता है जिससे मिलता है ताजा बासी खाना । ऐसी हालत में अगर हम केंद्र सरकार के संकटमोचक प्रणव बाबू होते तो कहते कि जो हो रहा है ,वह इसलिए हो रहा है कि कुछ हो चुका है । अब हो चुका है तो हो ही चुका है । मगर यह भी तो समझना चाहिए कि क्यों कुछ हुआ । अगर हम यह जान जाएं कि क्यों कुछ हुआ तो हम जान सकते हैं कि होने की प्रक्रिया क्या थी । क्या प्रक्रिया ही गलत थी या गलत को ही प्रक्रिया मान लिया गया । जब तक हम इसकी पड़ताल नहीं कर लेते तो कैसे खा सकते हैं ताजा बासी खाना । लेकिन ऐसा नहीं मानते देश के असली मानव संसाधन मंत्री और वक्त काटू सूचना तकनॉलॉजी और संचार मंत्री कपिल सिब्बल । मंत्री होने के पहले सिब्बल साहब वकील हुआ करते थे । वकील तर्क का भंडार होता है । अपनी जिरह की ताकत के बल सत्यमेव जयते को असत्यमेव जयते बना सकता है । वकील खानदानी विशेषज्ञ होता है भरी अदालत में माननीय न्यायमूर्ति को खिलाने का ताजा बासी खाना । प्रधानमंत्री जी न जाने कितने सवालों पर अपने चूल्हा पर प्रक्रिया की धीमी आंच पर गर्म करते रहते हैं बासी , काली बासी खाना प्रधानमंत्री के ओहदा का भी अपमान है । इसलिए बासी खाना ही नहीं सड़ा गला खाना को खिलाने के लिए गर्म गर्म करते रहते हैं । यह गर्म गर्म ही तो है ताजा बासी खाना । अब देखिए न , आपने प्रधानमंत्री को बड़ा मान कर पत्र लिखा कि बिहार के मुख्य मंत्री विकास का ताजा बासी खाना खिला रहे हैं । अब यहां प्रक्रिया की धीमी आंच पर उत्तर पकने लगा । प्रधानमंत्री ने खाद्य मंत्रालय से पूछा कि ताजा बासी खाना खिलाना गलत है या सही । खाद्य मंत्रालय बहुत सोच समझ कर कहा कि यह विषय खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय के तहत आता है । खाद्य मंत्रालय की इस राय के साथ प्रधानमंत्री कार्यालय से फिर पूछा गया खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय से । मंत्रालय ने प्रधानमंत्री को समझाया कि यह तो सरकार की नीति है । प्रधानमंत्री ने शिकायत कर्ता को पांच साल के बाद पत्र लिखा कि सरकार की नीति है खिलाना प्रसंस्कृत ताजा बासी खाना ।