जुगनू शारदेय

आज मन मेरा खुश खुश । और क्यों न हो खुश । हमारी और हमारी ही नहीं हमारी
बिरादरी की तारीफ , ऐरा गैरा नत्थू खैरा ने नहीं , जनाब वजीरे आजम ने की
है । कहा हुजूर ने कि खबरनवीस ने घूसखोरी की पोल खोल में कमाल का काम
किया है । वैसे हम भी कमाल से कम नहीं , फरमाया आका ए मुल्क ने कि हमने
भी साबित कर दिखाया उस मुर्गा की तरह जो वह ही नहीं उसकी मुर्गी भी
कुकड़ू कूं नहीं बोलती । ऐसे मौके पर चचा गालिब कहते हैं कि हमको है इस
राज़दारी पर घमंड , दोस्त का है राज दुश्मन पर खुला ।

अब हम एक ही बात बार बार लिखेंगे तो हम कलमची नहीं नकलचीं कहलाएगें । वो
कहेंगे तो तारीफ होगी कि देखो हुजूर में बला की सादगी कहीं भी राजी खुशी
हाजिर होने को तैयार रहते हैं । क्या बात है हुजूर की कि कम से कम तैयार
तो रहते हैं । और जाना जहां है दोनों का कोना तो संसद भवन मेँ है , चाहे
पीएसी में जाओ , चाहे जेपीसी में जाओ । पीएसी तैयार रहती है सदा ,जेपीसी
पर अब हुजूर तैयार नजर आते हैं । तभी तो चचा गालिब फरमाते हैं कि देखियो
, गालिब से गर उलझा कोई , हे वली पोशीदा ( छिपा हुआ महात्मा ) और काफ़िर
( अधर्मी ) खुला ।

किसकी हरकत है जो बार बार उछालता है बाजार में न सच्ची , न झूठी , न
अच्छी खबर , न बुरी खबर कि हम न मानेंगे अपने आपको रहबर । अजी हमें रहबर
क्या कोई कातिब न मानता । वह तो हुजूर , लोग उन्हें भूल गए हैं – भूल तो
हम भी गए हैं । कौन गुजरे जमाने को याद रखता है कि कोई पीवी नरसिंह राव
हुआ करते थे । आज तो याद किया जाता है मोहतरमा सोनिया गांधी की । हमने तो
बाकायदा उनको अपने यूपीए का मुखिया बना रखा है या यूं कहें कि उन्होने
हमें यूपीए का मुखिया बना रखा है । अरे जनाब हम अपने ओहदे से मुंह नहीं
मोड़ने वाले हैं , अभी यूपीए को बहुत काम करना है । अभी तक जो किया वह
बहुत कम है । अभी तो बहुत सारे हवा हवाई करना है । अब अपनी तारीफ क्या
करें , वह तो चचा गालिब कर रहे हैं कि फिर हुआ मिदहतराज़ी( प्रशंसा करना
) का ख्याल , फिर महओ खुरशीद ( सूर्य़ ) का दफ्तर खुला ।

अब और क्या कहें अपने रहबर के बारे में जो बहुत ही सादगी से फरमाते हैं
कि गठजोड़ की सियासत की भी अपनी हद होती है । मतलब समझें न कि हम भी अपनी
हद में रहते हैं क्योंकि चचा गालिब ने न जाने कब कह दिया था कि तुम करो
साहबकिरानी ( तेजस्विता दिखाओ ) जब तलक , है तिलिस्म – ए – रोज –ओ-शब (
दिन रात का जादू ) का दर खुला ।