तू बता ये देश भइये किस तरह आजाद है जब कि इसका हर बशर मेरी तरह नाशाद है,
तू बता ये देश भइये किस तरह आजाद है जब कि इसका हर बशर मेरी तरह नाशाद है,
तू बता ये देश भइये किस तरह आजाद है जब कि इसका हर बशर मेरी तरह नाशाद है,
अब भी नंगा नाच घर - घर मुफलिसी का हो रहा, आज भी रोटी यहाँ पर चाँद का अनुवाद है
कानपुर। जिस आजादी के सपनों लेकर हमारे भविष्य के लिए अपना वर्तमान न्योछावर करने वाले क्रांतिवीरो ने अपनी शहादत दी लेकिन इस देश के सर्वमान्य लोग उसको सम्भाल न सके और पुरे राष्ट्र को आर्थिक गुलामी कि ओर धकेल दिया हलीम पी. जी. कालेज के सभागार में आयोजित " अवाम का सिनेमा " समापन के अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार विजय चावला ने कही उन्होंने कहा 1990 के बाद देश के नेताओं ने डब्लू.टी.ओ के तहत जो संधि की है वो बड़ा ही शर्मनाक है इन लोगो ने देश के अवाम के साथ घात है | आज देश चौतरफा संकटो से गिर गया है ऐसे समय में देश के नौजवान पीढ़ी को समझना होगा और इस संकट से उबरने के लिए खुद रास्ता बनाना होगा |
वरिष्ठ रंगकर्मी विनोद पाण्डेय ने कहा कि हम अपनी बात मनवाना चाहते हैं लेकिन दूसरों की बात सुनना नहीं चाहते, जहां भी अराजकता दिखे, वहीं उसका प्रतिवाद करना चाहिए, आज सियासत असल मुद्दों ले लगातार भटकती जा रही है| आज सियासतदा लोगो के पास देश कि कोई समस्या नही है ये अपने खामियों को छुपाने के लिए ऐसे मुद्दे उठा देते है जिनका समाज व राष्ट्र से कोई सरोकार नही जिसके कारण जो समाज हित राष्ट्र हित के मुद्दे है वह गायब हो जाते है |
हलीम कालेज के उर्दू विभाग के हेड डा.फारुक साहब ने कहा कि आज पहले की अपेक्षा शिक्षा के स्तर में गिरावट आई है शिक्षा आज कारपोटेरो के हाथो में चली गयी है जिसके कारण देश में शिक्षा के गुणवत्ता में गिरावट आई है आज देश कि व्यवस्था ने शिक्षा को बाजार में बिकने का सामन बना दिया है| इस अवसर पर कालेज के छात्र रुमा परवीन, खुर्शीद आलम, फराज, जैनब बानो !
अवाम का सिनेमा के विधिक सलाहकार अभिषेक आनन्द , शाह आलम, नन्दकिशोर तिवारी, कुशल गुप्ता आदि ने अपने विचार रखे | समापन समारोह का संचालन अवाम का सिनेमा के प्रवक्ता सुनील दत्ता ने किया |दूसरे दिन भी क्रांतिवीरों से जुड़ी दुर्लभ तस्वीरों की प्रदर्शनी आकर्षण का केन्द्र रही !
दिखाई गई फिल्में -
*my body my weapon ये दस्तावेजी फिल्म इरोम शर्मिला के संघर्ष को दिखाती है !जो 15 सालों से भूख हड़ताल पर है !
*The man moved the mountain ये दस्तावेजी फिल्म दशरथ मांझी की कहानी बया करती है जो पूरी दुनियाँ में माउंटन कटर के नाम से मशहूर है अवाम का सिनेमा इन दोनो फिल्मों को विगत कई सालों से प्रदर्शित कर रहा है.


