दिनेश वशिष्ठ

कहा जाता है ऊपर वाले के देर है अंधेर नही , खुद को वक़्त का बेताज बादशाह समझने वालो को भी वक़्त के तराजू में तुलना पड़ता है. ताकत तभी तक साथ देती है जब तक वह सही रास्ते पर हो .शक्ति का बेजा फायदा जिस दिन से उठाना शुरू किया उसी दिन से बुरे दिनों की दिशा तय हो जाती है . वक़्त ने करवट बदली और राजस्थान पुलिस के दिग्गज अधिकारी और पुलिसकर्मी दारिया के जिन्न के कब्जे में आ गये , कल तक जो क़ानून का पाठ पढाया करते थे और पुलिस महकमे में जिनकी तूती बोलती थी आज उनकी बोलती बंद है ..राजनेता और अपराधियों के चंगुल में ऐसे फंसे कि न निगलते बन रहा है ,और न उगलते , एक अपराधी के फर्जी एनकाउंटर ने अधिकारियों की पतलून गीली कर दी .जयपुर के मानसरोवर इलाके के राजेंद्र नगर में २३ अक्टूम्बर २००६ को एनकाउंटर के नाम पर दारिया कि गोली मार के हत्या कर दी थी , इसमें वर्तमान में एपीओ ए डी जी क्राइम ए के जैन, आई जी क्राइम पोंनुचामी ,ए एस पी अरसद अली सहित ११ पुलिस कर्मी और एक पूर्व मंत्री राजस्थान सरकार के आरोपी है .
कहानी आरोप या सच्चाई …
दारिया शेखावाटी क्षेत्र के तस्कर सुमेर फगडिया का सबसे नजदीकी साथी था, दारिया के फर्जी एनकाउंटर से पहले शेखावाटी में शराब तस्करी के मामलों में दो गुटों में खूनी जंग छिड़ी हुई थी.. अपने समय में सुमेर का बोलबाला था आपसी गैंगवार में सुमेर की हत्या हो गयी तो गिरोह की जिम्मेदारी का बोझ दारिया के कंधो पर आ गया.. जिम्मेदारी निभाने की इसी कवायद में विजय ठेकेदार और विजेंद्र न्यान्गली गुट से ठन गयी .. विजय के बारे में मिली जानकारी के अनुसार १९८६ में फतेपुर में हुई शराब दुखान्तिका का मुख्य अभियुक्त और सीकर कोतवाली थाने का घोषित हिट्रीशीटर है.. सूत्रों की माने तो आपस में ठनने के बाद दारिया विरोधी गुट ने दारिया को ठिकाने लगाने के लिए शेखावाटी क्षेत्र के दबंग राजनेता से सांठ गाँठ कर ली ..शतरंज की बिसात ..२००५ में चूरू जेल में दारिया पर शराब तस्कर न्यान्गली और उसके गुर्गो ने हमला कर दिया था..अपने पर हमले का मुकदमा विजय और न्यान्गली के खिलाफ दर्ज करवा दिया,और इसी के चलते दिग्गज नेता को मुकदमा दर्ज करवाना नागवार गुजरा और वही से दारिया को मौत के घाट उतारने का खेल प्रारम्भ हो गया ..एन काउंटर की इस बिसात में ए डी जी जैन का नाम जुड़ गया ..अब ए डी जी ने अपना खेल खेलना शुरू कर दिया इसके लिए सबसे पहले नेता के इशारे पर अपनी ताकत का इस्तेमाल करते हुए उस समय के पुलिस अधीक्षक से दारिया के खिलाफ इनाम की सिफारिश करवा ली ,सिफारिश के बाद सीधे मुख्यालय से पच्चीस हजारी वांछित अपराधी घोषित करवा दिया जो नियम विरूद्ध था .. होता यह है की एस पी की सिफारिश पर आई जी इनाम घोषित करता है , यदि अपराधी नही पकड़ा जाता है तो पुनः आई जी की सिफारिश पर मुख्यालय इनाम की राशि घोषित करता है..दारिया एन काउंटर की कहानी को अंजाम तक पँहुचाने के लिए महज पांच दिन का वक़्त लगा ..१८ अक्टुम्बर २००६ को इनाम घोषित होते ही दारिया की हत्या की बिसात बिछाने की तैयारी होने लग गयी ..सी.बी.आई के पुख्ता सबूतों के दावों पर गौर करे तो दारिया की हत्या पूरी सोच समझ के साथ अंजाम दी गयी थी..हत्या के एक दिन पहले २२ अक्टुम्बर को बाकायदा मानसरोवर के मौका स्थल की रेकी कर आरोपी पुलिस वालो ने प्लान के तहत दारिया पर फायर करने की पूरी तैयारी की थी.. इनाम घोषित हो चुका था,अब काम था दारिया को पकड़ना एस ओ जी लगातार शेखावाटी क्षेत्र में दारिया को गिरफ्त में लेन के लिए दबिश दे रही थी..एस ओ जी की सहायता के लिए विजय ने इशारा किया और २१ अक्टूबर की रात को दारिया एस ओ जी की गिरफ्त में आ गया ..२२ तारीख को प्लान का खाका मौका -ए -वारदात पर कर लिया गया था ,और २३ अक्टुम्बर को पूर्ण नियोजित तरीके से दारिया का एनकाउंटर कर दिया गया..इस फर्जी मुठभेड़ से सभी आरोपी अधिकारियो और पुलिसकर्मियों को अपने पर नाज था..विभाग और सत्ता के गलियारों में खूब वाह-वाही हुई और इनाम स्वरूप सम्मान और मनमुताबिक सुविधाए भी प्राप्त हुई लेकिन पाप का घडा ज्यादा दिन तक नही भरा रह सका..दारिया की विधवा ने अपने पति की मौत की हकीकत दुनिया के सामने लाने का मानस बना लिया, वह अदालतों के चक्कर काटती रही,जांच की फोरी कार्रवाई में मानवाधिकार ने भी अपना इल्म दिखाया पर नतीजा वही ढाक के तीन पात वाला ही रहा जैसे अधिकतर जांचो में होता है, सब सिस्टम मैनेज के तहत आरोपियों के अनुकूल हो गया.. लेकिन विधवा पत्नी ने हार नही मानी ,वह दिन रात इस मकसद में जुटी रही कि सच्चाई बाहर आये और जैसे ही फर्जी एन काउंटर पर सुप्रीमकोर्ट ने शिकंजा कसा तो दारिया के जिन्न की हकीकत सामने आने का रास्ता तय हो गया ..पत्नी की याचिका पर सुप्रीमकोर्ट ने ९अप्रेल २०१० को सी बी आई को जांच सौप दी ,एक बार तो सी बी आई की कार्रवाई मे भी ढीलापन नजर आने लगा पर ७ जनवरी २०११ कोर्ट की फटकार ने और दो माह में
जांच कर दोषियों को सजा दिलाने के निर्देश दे डाले तो, सी बी आई ने हत्या से जुडी सभी कड़ीयो को समेटना प्रारंभ कर दिया और एक के बाद एक बड़े नामो का खुलासा होने लगा ..दिग्गज राजनेता का भी सी बी आई की आरोप चार्जशीट में नाम आ गया है ..बस देखना यह की सी बी आई आरोपों को साबित कर दारिया के जिन्न की आत्मा को शांत कर विधवा पत्नी की कसम को पूरी करती है..

लेखक दिनेश वशिष्ठ राजस्थान में अपराध की पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं…….उनसे ०९६९४०८५६५१ नंबर पर संपर्क किया जा सकता है……….