दावा का वादा
दावा का वादा
दावा का वादाअब वक्त आ गया है दोस्तों कि हम दावा और वादा का फर्क समझ लें । मुश्किल यह है कि हम अभी तक दावा ही नहीं समझ पाएं हैँ । दावा ही नहीं समझेंगे तो आप लोकतंत्र ,उसका भी बाप सेक्युलरवाद और दादा भारतीय संस्कृति की परंपरा को कैसे समझेंगे । दावा दर्शन के पिताहम इंद्र देव को कैसे समझेंगे जिन्होने हर तपस्याकारी की तपस्या भंग करने के लिए न जाने क्या क्या किए । मोटे तौर पर आज इसे इस तरह समझा जा सकता है कि सरकार बचाने और चलाने के लिए तरह तरह का दावा किया जाता है । दावा का वादा कभी पूरा न हो इसका संपूर्ण सत्यनिष्� ा या ईश्वर की सौगंध के साथ निर्वहन किया जाता है ।
दावा और वादा शब्दों का हेर फेर भर ही नहीं मन की उड़ान भी है । उड़ान पर याद आया कि नैनौ का दावा कर अपना वादा निभाने वाले रतन टाटा का नया दावा कि उनसे भी पंद्रह करोड़ की रिश्वत मांगी गई की जानकारी वही है जिसे संपूर्ण सत्यनिष्� ा या ईश्वर की सौगंध के साथ निर्वहन किया जाता है । अभी हाल में उन्होने चलते चलते यह बात कह दी कि उन्हें सत्त वचन वाली सलाह दी गई कि काम करवाना हो तो 15 करोड़ रुपए दे दो और हवा में टाटा की सिंगापुरी ऊड़ान भरो । यह उड़ान पिछले पंद्रह साल के उड़ान मंत्रियों ने की । मतलब 1995 से 2010 तक । इस दौरान देश की तरक्की करने का वादा घोंघाप्रसाद वसंतलाल नुमा पार्टियों से ले कर सेक्युलर कांग्रेस और सांप्रदायिक भारतीय जनता पार्टी के लोग भी मंत्री रहे । अब तो रतन टाटा रिटायर होने वाले हैं । सिर्फ दावा कर उन्होने न जाने कितने उड़ान मंत्रियों और उनके मेहरबान प्रधानमंत्रियों के वादा को एअर इंडिया की उड़ान बना दिया है जो उड़ती कम है , मगर लगातार उड़ते रहने का वादा जरूर करती है ।
लगातार उड़ता रहना अब चुनाव की भी मजबूरी है । जनता से जुड़ने का दावा करने वाला प्रत्येक नेता चुनाव के समय या तो उड़ता रहता है या वादा करता रहता है । यहां नेता इंद्रवादी भी हो जाता है और वोटर की तपस्या भंग करने के लिए उसे तरह तरह का लालाच देता है । लालच देना एक प्रकार का भ्रष्टाचार है । इसे ही जब प्रलोभन कहा जाता है तो यह प्रगति हो जाता है । प्रगति कुछ नहीं होता यह सरकार का यह दावा होता है कि विकास दर नौ प्रतिशत तक पहुंच जाएगा । विकास दर कुछ नहीं होता है । सरकार का दावा होता है कि उसने जितने वादा किया ,वह पूरा हुआ । यह और बात है कि अलग अलग लोग समय समय पर इसे बदलते रहते हैं ।
सरकार के बारे में आपको पता है कि यह सिर्फ सरकार नहीं होती । यह केंद्र सरकार और राज्य सरकार होती है । कुछ राज्य सरकारों का दावा होता है कि उनका विकास दर 11 प्रतिशत से ज्यादा है । इस दावा के बावजुद ऐसी राज्य सरकारें कभी अपने राज्य में नैनौ को टिका कर गरीबी मिटाने का वादा करती हैं और कुछ सरकारें भ्रष्टाचार मिटाने का वादा करती हैं ।
हम तो बस इतना ही समझते हैं कि जो विकास का दावा करते हैं , उनके यहां लोग जाति के जकड़न का वादा करते हैं । बड़ा मुश्किल है समझना दावा का वादा !


