दिल्ली पहुंची सपा की साइकिल, सवारों का झगड़ा चुनाव आयोग के पाले में
दिल्ली पहुंची सपा की साइकिल, सवारों का झगड़ा चुनाव आयोग के पाले में
दिल्ली पहुंची सपा की साइकिल, सवारों का झगड़ा चुनाव आयोग के पाले में
Samajwadi Party's 'cycle' comes to Delhi : Party symbol is mine, Mulayam says
नई दिल्ली, 02जनवरी। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी दो टुकड़ों में बंट गई है। सुलह की सभी कोशिशें नाकाम साबित हुईं, वहीं अब समाजवादी पार्टी में साइकिल को लेकर जंग छिड़ी हुई है।
लड़ाई इस बात को लेकर है कि साइकिल चुनाव चिन्ह का हकदार कौन है।
मुलायम और अखिलेश दोनों ही इस पर अपना दावा जता रहे हैं।
इस जंग को लेकर फिलहाल मुलायम सिंह यादव, शिवपाल यादव, अमर सिंह और अखिलेश खेमे से राम गोपाल यादव दिल्ली में डेरा जमाए हुए हैं। यहां भी जुबानी जंग जारी है।
दिल्ली आते ही आज रामगोपाल यादव ने मुलायम सिंह यादव पर ज़ोरदार हमला बोला। जब उनसे पूछा गया कि एक जनवरी को लखनऊ में हुए पार्टी अधिवेशन को मुलायम सिंह यादव ने असंवैधानिक घोषित कर दिया है तो रामगोपाल यादव ने कहा कि वो क्या सुप्रीम कोर्ट के जज हैं. जो ऐसा करेंगे, हम भी पार्टी का संविधान जानते हैं।
इससे पहले खबर ये आई थी कि मुलायम सिंह यादव ने 5 जनवरी को समाजवादी पार्टी का होने वाला अधिवेशन स्थगित कर दिया गया है।
शिवपाल यादव ने ट्वीट करके यह जानकारी थी।
शिवपाल यादव ने कहा कि मैं मरते दम तक नेताजी के साथ रहूंगा। नेताजी ही पार्टी के अध्यक्ष हैं।
उधर समाजवादी पार्टी में जारी घमासान के बीच अमर सिंह भी लंदन से दिल्ली लौट आए हैं।
दिल्ली लौटे अमर सिंह ने कहा कि वो मुलायम सिंह के साथ हैं। उन्होंने कहा मेरे लिए दल नहीं दिल ज़रूरी है। मुलायम के लिए खलनायक भी बनना पड़ा तो मंजूर है।
आपको बता दें कि कल अखिलेश यादव ने रामगोपाल धड़े के पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन में अमर सिंह यादव को पार्टी से बाहर कर दिया था, वहीं बेटे अखिलेश के तख्तापलट के बाद मुलायम सिंह यादव भी काफी परेशान नज़र आ रहे हैं।
खबर है कि चुनाव सिंबल को लेकर मुलायम सिंह यादव कानूनी राय ले सकते है और सुप्रीम कोर्ट भी जा सकते हैं मुलाय़म।
आपको बता दें कि इससे पहले रविवार को रामगोपाल द्वारा बुलाए पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन में हज़ारों की संख्या में मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मुलायम सिंह को हटाकर अखिलेश यादव को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया और मुलायम को पार्टी का संरक्षक घोषित किया।
-तो अब साइकिल किसकी होगी और कौन इस पर सवारी करेगा...ये जंग चुनाव आयोग तक पहुंच चुकी है, हालांकि दोनों ही खेमे साईकिल पर अपना अधिकार जता रहे हैं, लेकिन चुनाव आयोग क्या फैसला लेगा, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
जब्त हो सकता है साइकिल चुनाव चिन्ह : कुरैशी
इस बीच पूर्व निर्वाचन आयुक्त एस.वाई.कुरैशी ने कहा है कि ऐसा भी हो सकता है कि दोनों में से किसी भी गुट को साइकिल चुनाव चिन्ह न मिले।
एक निजी टेलीविजन चैनल से कुरैशी ने कहा,
"अपने पास बहुमत को दर्शाने के लिए दोनों पक्ष अपने दावे के पक्ष में हलफनामा और अपने समर्थकों के हस्ताक्षर पेश करेंगे।"
उन्होंने कहा,
"इनका सत्यापन होगा और इसमें चार से पांच महीने का वक्त लग सकता है। मुझे नहीं लगता कि यह चुनाव से पहले होने जा रहा है, क्योंकि दोनों पक्षों के दावे मजबूत हैं और दोनों मजबूती से अपना पक्ष रखेंगे।"
कुरैशी ने कहा,
"साइकिल चुनाव चिन्ह को जब्त कर लिया जाएगा तथा अनौपचारिक नाम तथा अनौपचारिक चुनाव चिन्ह प्रदान किए जा सकते हैं। निर्धारित प्रक्रिया तथा उसी के हिसाब से लगने वाले समय के बाद अंतिम फैसला आएगा।"
देखते रहिए डीबी लाइव


