दिल्ली में कार फ्री डे से पहले ग्रीनपीस ने किया वायु प्रदूषण के खिलाफ लोगों को जागरूक
दिल्ली में कार फ्री डे से पहले ग्रीनपीस ने किया वायु प्रदूषण के खिलाफ लोगों को जागरूक
नई दिल्ली, 18 अक्टूबर। दिल्ली में प्रथम ‘ कार फ्री डे ’ से पहले ग्रीनपीस ने रविवार को दिल्ली हाट में वायु प्रदूषण के बारे में जानकारी देने के लिये एक जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम के माध्यम से पर्यावरण संस्था ग्रीनपीस ने लोगों को वायु प्रदूषण से बचाव के लिये जागरुक किया और सरकार से मांग की है कि राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक (एनएक्यआई) में जरुरी सुधार किये जायें, जिससे वायु प्रदूषण की सही-सही जानकारी लोगों को मिल सके।
यह कार्यक्रम ग्रीनपीस के ‘स्वच्छ वायु राष्ट्र अभियान’ के तहत वॉलंटियरों द्वारा आयोजित किया गया था। वालंटियरों ने अनेक रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से लोगों को वायु प्रदूषण के खतरे से बचने के लिये बरते जाने वाले एहतियाती उपायों के बारे में बताया। कार्यक्रम में विशाल धरती के प्रतीक के रूप में एक बड़े ग्लोब को मास्क लगाया गया था। कार्यक्रम के दौरान वॉलंटियरों ने लोगों से बातचीत किया और वायु प्रदूषण से जुड़े आसान से सवाल-जवाब किये। इन गतिविधियों के माध्यम से ग्रीनपीस ने लोगों से वायु प्रदूषण पर सरकार से सटीक जानकारी मांगने के लिये प्रोत्साहित किया और सरकार से मांग की कि वह स्वच्छ वायु को लेकर अपनी प्रतिबद्धता को दिखाते हुए योजनाओं को अमलीजामा पहनाये।
ग्रीनपीस इंडिया की कैंपेनर रुथ डिकॉस्टा ने कहा, “दिल्ली हाट आने वाले लोग अगर एहतियात नहीं बरतते हैं तो उनके स्वास्थ्य पर खतरा है। वर्तमान समय में वायु गुणवत्ता को लेकर सूचना और एहतियाती उपायों के अभाव में सैकड़ों लोगों खासकर बच्चे और बुजुर्गों के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा है। तत्काल स्वास्थ्य पर कोई कुप्रभाव नहीं होने से लोग वायु प्रदूषण से खतरा महसूस नहीं कर पाते हैं। राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता निगरानी सूचकांक लगाने के पीछे सरकार की अच्छी मंशा थी लेकिन यह प्रक्रिया तबतक अपूर्ण है जबतक कि लोगों को जागरुक नहीं किया जाये और मास्क लगाने, भारी प्रदूषण के दिन कार नहीं चलाने जैसे एहतियात नहीं बरते जायें।”
पूरे देश में दिल्ली वायु प्रदूषण की प्रतीक बन गयी है। धीरे-धीरे यह समस्या सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रह जाएगी। हाल ही में ग्रीनपीस ने ताजा स्थिति की जांच के दौरान पाया कि एनएक्यूआई को लागू करने के निवेश, व बुनियादी ढांचे में काफी अन्तर है। सूचकांक के आकड़ों को ऑनलाइन उपलब्ध कराने के लिये केवल दिल्ली में 10 निगरानी स्टेशन हैं, वहीं चेन्नई, बेंगलूर और लखनऊ में तीन-तीन स्टेशन हैं, जबकि हैदराबाद में दो स्टेशन हैं और अन्य दस शहरों में केवल एक-एक स्टेशन ही हैं। यही नहीं, दिल्ली में भी राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक के आकड़े निरर्थक हैं क्योंकि आंकड़ों के प्रसार के लिये कोई व्यवस्था नहीं है, स्थानीय प्रशासन द्वारा सबसे अधिक वायु प्रदूषण वाले दिन से निपटने के लिये कोई साझी योजना नहीं है, और न ही इन आकड़ों के आधार पर लोगों को प्रदूषण से निपटने के लिये कोई सूचना दी जाती है।
ग्रीनपीस के कैंपेनर सुनील दहिया ने कहा, “सर्दी के दिनों में वायु प्रदूषण ज्यादा बढ़ जाता है। लोगों के पास पहले से ही कोई जानकारी नहीं है और दुर्भाग्य से राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक भी पारदर्शिता के अभाव में सीमित प्रभाव ही डाल पा रहा है। दिल्ली सरकार द्वारा प्रथम ‘कार फ्री डे’ का आयोजन किया जाना स्वागतयोग्य कदम है। पहली बार वायु प्रदूषण को लेकर चलाये जा रहे जागरुकता अभियान में लोगों को भी शामिल किया गया है, लेकिन यह अपने आप में बहुत छोटी पहल है। जब तक राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक में कोई ठोस सुधार नहीं की जाती, लोगों को एहतियाती कदम उठाने के लिये नहीं कहा जाता तबतक सुधार की गुंजाईश नहीं है। हम अपने इस कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को वायु प्रदूषण के बारे में जानने का अधिकार, स्वच्छ वायु का अधिकार आदि के बारे में जागरुक करने की कोशिश कर रहे हैं।
ग्रीनपीस इंडिया लोगों के अधिकार में विश्वास करता है और मानता है कि नागरिकों को जीने का अधिकार, स्वच्छ वायु का अधिकार है। अपने स्वच्छ वायु अभियान के माध्यम से ग्रीनपीस लोगों के अधिकार को मजबूती प्रदान करने की कोशिश कर रहा है।


