दिल्ली सोलर नीति में 2 गीगावाट सौर ऊर्जा उत्पन्न करने का लक्ष्य
दिल्ली सोलर नीति में 2 गीगावाट सौर ऊर्जा उत्पन्न करने का लक्ष्य
सौर ऊर्जा की क्षमता के लाभ उठाने का आदर्श समय: ग्रीनपीस
नई दिल्ली। 26 अगस्त 2015। ग्रीनपीस ने दिल्ली सरकार से दिल्ली के छतों पर सोलर ऊर्जा की क्षमता को तलाशने और सोलर नीति के प्रारूप पर आगे बढ़ने की उम्मीद रखी है। मंगलवार को दिल्ली डॉयलॉग कमिशन (डीडीसी) द्वारा आयोजित ‘दिल्ली सोलर राउंडटेबल कॉन्फ्रेंस’ में दिल्ली सरकार की सोलर नीति का प्रारूप प्रस्तुत किया गया। इस राउंडटेबल में डिसकॉम्स, डेवलपर्स, सरकारी अधिकारी, दिल्ली के बिजली नियामक आयोग, जर्मनी से सौर ऊर्जा विशेषज्ञ और ग्रीनपीस सहित अन्य गैर सरकारी संगठन शामिल हुए और अपना परामर्श दिया।
पुजारिनी सेन की जलवायु और ऊर्जा कैंपेनर पुजारिनी सेन ने कहा, “जुलाई 2013 में, ग्रीनपीस ने ‘रूफटॉप रिवोल्यूशनः अनलिशिंग डेल्ही’स सोलर पोटेंशियल’ नामक एक रिपोर्ट जारी किया था, जिसमें स्पष्ट किया गया कि दिल्ली में 2020 तक 2 गीगावाट सौर ऊर्जा पैदा करने की क्षमता है। बीच के वर्षों में राजनीतिक अस्थिरता की वजह से इस महत्वाकांक्षी समाधान को लागू करने में देरी ज़रूर हुई है लेकिन हमें उम्मीद है कि दिल्ली सरकार अपने इस ड्राफ्ट में दिये गए टाइमलाइन को पूरा करते हुए क्रमशः 2020 तक 1 गीगावाट और 2025 तक 2 गीगावाट सौर ऊर्जा के लक्ष्य को पूरा कर पायेगी।”
इस राउंडटेबल और सौर ऊर्जा नीति प्रारूप के साथ आम आदमी पार्टी की सरकार ने अपने एक चुनावी वादे को पूरा करने के लिये एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। इस राउंडटेबल में संक्षेप रुप से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने स्वच्छ ऊर्जा के प्रति अपनी सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। हालांकि मुख्यमंत्री ने नागरिकों पर इससे अतिरिक्त टैरिफ का भार नहीं आने देने की बात पर जोर दिया, राउंडटेबल में मौजूद विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि इस बात के पुख्ता हल पेश किये गए हैं जिससे आम नागरिकों को अतिरिक्त भार नहीं उठाना होगा।
इस प्रारूप में कई ऐसी चीजों को शामिल किया गया है जिनके लागू होने पर आवासीय और अन्य ग्राहकों को कई फायदा होंगे। हालांकि आवासीय क्षेत्र के लिये सोलर टैरिफ को अभी भी परंपरागत ऊर्जा टैरिफ के बराबर लाना बाकी है, शुरूआती उपभोक्ताओं को प्रोत्साहित करने के लिये ‘जेनरेशन बेस्ड इनसेंटिव’, जिसमें शुरू में तीन साल तक 2 रुपये प्रति सोलर यूनिट देने की योजना हैi। इस प्रारंभिक प्रारूप में विशेष तौर पर सरकार, औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों पर जोर देने की बात की गयी है। मौजूदा टैरिफ संरचनाओं को देखते हुए, और प्रस्तावित ‘कॉन्सोलिडेटेड नेट मीटिरिंग’ के बाद इस क्षेत्र में बिना किसी सब्सिडी के भी महत्वपूर्ण बचत को हासिल किया जा सकता है।
पुजारिनी ने कहा, “दिल्ली में छतों पर सोलर ऊर्जा की अपार क्षमता है। बाजार की वर्तमान स्थिति को देखते हुए, ऊर्जा के विकेन्द्रिकृत मॉडल को अपनाने के लिये यह उपयुक्त समय है। हमारे ‘स्वीच ऑन द सन’ (सूरज की बत्ती जलाओ) अभियान के समय महत्वपूर्ण साझीदार होली फैमिली अस्पताल ने इस तरह से सौर ऊर्जा का सफल प्रयोग किया है, और इस राउंडटेबल में उनके अनुभवों को एक केस स्टडी के रूप में भी जाँचा गया। ग्रीनपीस ने इस अस्पताल से जाना कि वह सौर ऊर्जा के कारण अपने बिजली के बिल में 15 लाख रुपये सलाना बचत कर पा रहे हैं।
ग्रीनपीस इंडिया सौर ऊर्जा में राष्ट्रीय निवेश के लिये अभियान चलाता रहा है। 2013 में प्रकाशित इसके रिपोर्ट ‘पावरिंग अहेड विद रिन्यूवेबलः लीडर्स एंड लगार्ड्स’ में अक्षय खरीद दायित्व (आरपीओ) प्रदर्शन की राष्ट्रीय रैकिंग प्रस्तुत किया है। इस रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला राज्य है जिसकी ऊर्जा मिश्रण में सौर ऊर्जा का योगदान एक प्रतिशत से भी कम है। प्रस्तावित मसौदे में अक्षय खरीद दायित्व (आरपीओ) को बढ़ाकर 75 प्रतिशत तक करने का प्रस्ताव है, जो पिछले प्रदर्शन को देखते हुए काफी प्रगतिशील सुझाव है।
इस मसौदे पर बात करते हुए दिल्ली डॉयलॉग कमीशन के उपाध्यक्ष आशीष खेतान ने कहा, “हम चाहते हैं कि दिल्ली सोलर सिटी के नाम से विश्व भर में पहचानी जाय और लोगों को स्वच्छ ऊर्जा प्राप्त हो। हमारा लक्ष्य है कि हम दिल्ली के ऊर्जा प्राथमिकताओं को पूरा करने वाली नीति लायें।”
पुजारिनी ने आगे कहा, “ग्रीनपीस ने दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार को दिखलाया है कि वह सौर ऊर्जा में निवेश करके अपने एक नहीं बल्कि दो-दो चुनावी वादों को पूरा कर सकती है। हमने इस साल के शुरुआत में डीडीसी को अपनी रिपोर्ट ‘ससटेनबल स्ट्रीट लाइटिंगः दिल्ली’ भी सौंपी है, जिसमें दिल्ली के अँधेरी गलियों को रौशन करने के लिये सोलर स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था का प्रस्ताव रखा है और हमने इस संबंध में डीडीसी के साथ कई चरणों में बात की है. यदि इस योजना को लागू किया जाय तो सूरज की स्वच्छ रौशनी से प्रज्वलित सोलर स्ट्रीट लाइट वाकई में दिल्ली को अपनी टिकाऊ ऊर्जा भविष्य की ओर बढ़ने के लिये मार्गदर्शित करेगी।


