अमिताभ ठाकुर
किस को भगवान मानते हो तुम,
आखिर कोई तो होगा जगत में,
जिस के आगे शीश झुकाते होगे,
...आरती-वन्दना करते होगे,
जिस से होता होगा खौफ्फ़ का भाव,
जिस के डर से नहीं करते होगे गलत काम,
जो मसीहा होगा तुम्हारा,
लालन-पालन करता होगा,
जिसकी कृपा से पलते होंगे तुम्हारे बच्चे,
जो पालता होगा तुम्हारी बीवी को भी,
जो सर्वव्यापी, सर्वशक्तिमान होगा,
और सब कामों में सक्षम,
अरे कोई तो होगा ऐसा,
जो पूरी करे समस्त अर्हताएं,
वन्दनीय, पूजनीय, भयदायक भगवान की.
ईश्वर ने जब किया यह सवाल,
कसबे के कोने की झोपडी में रहने वाले,
दीन, हीन, अनाथ दीनानाथ से,
तो उसे एक पल नहीं लगा,
बात समझने और उत्तर देने में,
रामेश्वर ठेकेदार हैं ऐसे,
और कौन होगा उनके अलावा,
शीश झुकाता है दीनानाथ उनको,
कभी-कभी उनको खुश करने को,
उनकी पूजा, अर्चना भी,
प्रार्थना और मिन्नतें तो रह रोज,
डरता भी है, खौफ भी खाता है,
उन्ही के दिए पर पल रहे हैं बच्चें,
और धनिया भी तो उन्ही की है,
जब मन हुआ बुला लिया शरण में,
सब कुछ तो हैं ही वे,
और बहुत ताकतवर भी,
बड़े प्रभावशाली बड़े दिल वाले और कृपालु,
कुछ ना कुछ अधिके देते रहते हैं हैं बिन मांगे,
अच्छा तो वे भगवान हुए,
समझ गया दीनानाथ
और तुरंत दिया उत्तर भगवान को,
जिन्हें भी बात आ गयी समझ में,
तब के तब, एक दम से,
और तब से ले कर आज तक,
भगवान दुबारा नहीं आ रहे,
किसी दीन और अनाथ से पूछने,
कि कहाँ है उनका भगवान रामेश्वर ठेकेदार