धरती के अंतिम सम्राट
धरती के अंतिम सम्राट
बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ सारे संसार का सारा सरमाया समेट रही हैं और पर्यावरण को समाप्त कर रही हैं उस ओर इशारा करती कविता है यह जसबीर चावला की। प्रतीक के रूप में रानी मधुमक्खी, मेक्सिको के रॉकी पर्वत से अमेरिका, कनाडा की यात्रा पर जाने वाली मोनार्क तितली (दोनों में राजा के प्रतीक हैं) की समाप्ति के बाद नये सम्राट होंगे / हैं ये बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ।
धरती के अंतिम सम्राट
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जब अंतिम फल भी तोड़ लिया जायेगा पेड़ से
अंतिम पेड़ भी काट लिया जायेगा
अंतिम नदी विषाक्त कर दी जायेगी
धरती की छाती को छेद कर पानी की अंतिम बूँद भी निचोड़ ली जायेगी
उदरस्थ हो जायेगा अंतिम पक्षी
सागर की अंतिम मछली भी
आख़री जानवर भी हलाक हो चुका होगा
जहर घुला होगा हवाओं में
रानी मधुमक्खी मर चुकी होगी शहद के छत्ते में
रॉकी पर्वत से उड़ चुकी होगी आख़री मोनार्क
सारी धरती तब तुम्हारी ही होगी
तुम ही अकेले होगे अंतिम सम्राट
// जसबीर चावला //


