“नक़्शे में से नाम मिटा दो पापी पाकिस्तान का” की हुंकार भरने वाले 'हिन्दू राष्ट्रवादियों' से सहज प्रश्न
मधुवन दत्त चतुर्वेदी
पाकिस्तान का नाम नक़्शे से मिटाने की हुंकार भरने वाले 'हिन्दू राष्ट्रवादियों' से सहज प्रश्न -

पाकिस्तान को जीत कर भारत में मिलाने से जनसँख्या का हिन्दू-मुस्लिम अनुपात आज के मुकाबिल क्या होगा ?
क्या यह काम आपके हिन्दू हितरक्षक नेताओं और कथित संत-साध्वियों के अधिक बच्चे पैदा करने के आह्वान को पलीता नहीं लगा देगा ?

आतंकवाद को आश्रय देने वाले पश्चिमी पड़ौसी से मुक्ति के बाद हमारी सीमा अफगानिस्तान होगी । क्या तब इस्लामिक आतंकवाद के आयात-निर्यात का कोई संकट न रह जायेगा ?
क्या आप जानते हैं कि अफगानिस्तान तालिबान का गढ़ है जहाँ के इस्लामिक आतंकवादी समूह पाकिस्तान में सक्रिय आतंकवादियों से हजार गुना बड़े हैं ?
क्या यह सही नहीं कि अफगानिस्तान की गनी सरकार सिर्फ काबुल तक सिमटी लाचार सरकार है ?
क्या आज भी पाकिस्तान एक देश के तौर पर अफगानिस्तान के मुकाबिल बेहतर राज्य व्यवस्था और यूएन के प्रति जबाबदेह नहीं है ?
क्या पाकिस्तान को जीतने के बाद आज की दुनिया में पाकिस्तान की पूरी जनसँख्या का नर संहार किया जा सकना संभव है ?
क्या पाकिस्तान को जीत कर भारत में मिलाते ही भारत को हिन्दू-राष्ट्र बनाने का आपका स्वप्न सदा के लिए मर नहीं जायेगा ?
क्या वाकई आप पाकिस्तान को मिटाना चाहते हैं या पाकिस्तान के नाम पर हिन्दुस्तान के मुसलमानों के प्रति नफ़रत को बढ़ाना आपका मकसद है ?

और हाँ , इन सावालों के जबाब में जो भी ये पूछेगा या इल्जाम लगाएगा कि आप पाकिस्तान के हिमायती हो उसे निर्विवादरूप से श्रेष्ठ-संघी के पुरूस्कार से नवाजा जायेगा ।