नक्सली आन्दोलन के पास भारतीय समस्याओं के कार्यक्रम मौजूद हैं - बूटा सिंह
नक्सली आन्दोलन के पास भारतीय समस्याओं के कार्यक्रम मौजूद हैं - बूटा सिंह
बूटा सिंह हमारे समय के एक गंभीर विचारक, सामाजिक और राजनैतिक कार्यकर्ता हैं, जिनकी समझ देश दुनिया और उसके अंतर्संबंधों पर बेहतरीन सांस्कृतिक है। साम्राज्यवाद, दुष्कर्मों को समझने की उनकी पैनी नज़र केवल भारत और उस पर पड़ने वाले प्रभावों से ही आगे नहीं करती वरन क्या करना चाहिए, इस प्रश्न पर भी वह उतने ही स्पष्ट हैं। पंज़ाब की संगठित सामाजीक राजनैतिक शक्तियों की खबर और उसे दिशा देने के एक प्रयास के तहत वह एक संजीदा रिसाले “सुलगते पिंड” के संपादक होने के साथ-साथ डेमोक्रेटिक राइट्स संस्थाएँ के प्रेस सचिव भी हैं।
लगभग 19 बेहतरीन किताबों और अनगिनत आलेखों का अंग्रेजी से पंजाबी में अनुवाद कर चुके बूटा सिंह ने पंजाब के बुद्धिजीवियों वर्ग में अपनी नासमझियत बनाई है। लोग उनकी वाणी को तरजीह देते हैं, उनकी शक्षियत की बढ़ती ख्याति अब भारत की सरहदें लांघ कर दुनिया के दूसरे हिस्सों में पहुँचने लगी है। वेेंकूवर से प्रकाशित, गुरुप्रीत सिंह द्वारा संपादित ‘रेडिकल देसी’ पत्रिका एवं अन्य सामाजीक संगठनों के सहयोग के चलते बूटा सिंह को कनाडा आमंत्रित किया गया, जहां कई शहरों में उनके व्याख्यान हुए, जिन्हें सुनने के लिए भारी संख्या में लोगों ने शिरकत की। इसी प्रकिर्या में वह ब्राम्पटन भी आए जहां उनका एक व्याख्यान दिनांक दस मई 2015 को हुआ।
एक दिन पूर्व टोरंटो विश्वविद्यालय में आयोजित किए गए कार्यक्रम में वह बोल चुके हैं। उनके द्वारा अनुवाद की गई कृतियों में नेयमी क्लीन की “शॉक डॉक्ट्रीन”, जॉन पर्किन्स की “कॉनफेशन्स ऑफ इकनोमिक हिटमैन” नामक महत्वपूर्ण किताबें प्रमुख हैं। बूटा सिंह के ब्राम्पटन प्रवास के अवसर पर हस्ताक्षरित सहयोगी प्रयासों के चलते बूटा सिंह को कनाडा स्थित हमारे सहयोगी शमशाद इलाही के द्वारा लंबी बातचीत की। यहां प्रस्तुत है, उनसे बातचीत का लेखा-जोखा।
मोदी विरोध मस्ट है और जस्ट है।


