नागलोक
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वे रोज छोड़ते है
ज़हरीले साँप बस्ती में
हम ढूँढते हैं मंत्र
ओझा जहरमोरा
और पीटते हैं लकीर
न पकड़ पाते
न मार पाते
बस जला लेते हैं हाथ
और मिटा लेते हैं कुछ लकीरें हथेलियों की
।। जसबीर चावला ।।
जसबीर चावला