दिल्ली की निजी वितरण कम्पनियों का लाइसेन्स रद्द करने और ऊर्जा क्षेत्र व उपभोक्ताओं के हित में सभी निजी बिजली कंपनियों का सीएजी आडिट करने की मांग
लखनऊ। समाचार पत्रों में प्रकाशित सीएजी की रिपोर्ट में दिल्ली की निजी वितरण कम्पनियों का घोटाला उजागर होने के बाद बिजली इंजीनियरों ने मांग की है कि दिल्ली की वितरण कंपनियों का लाइसेन्स तत्काल रद्द किया जाये और देश के सभी प्रांतों में काम कर रही सभी निजी कंपनियों का ऊर्जा क्षेत्र एवं आम उपभोक्ताओं के व्यापक हित में सीएजी आडिट कराया जाये। दिल्ली के घोटाले को देखते हुए बिजली इंजीनियरों ने नियामक आयोग की कार्य प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किये हैं।
आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे, उप्र विद्युत अभियंता संघ के अध्यक्ष आर के सिंह एवं महासचिव डी सी दीक्षित ने आज यहाँ जारी बयान में कहा कि दिल्ली के बारे में सीएजी रिपोर्ट के खुलासे से साफ हो गया है कि आडिट का डर न होने के कारण निजी कंपनियों ने बेख़ौफ़ होकर आम जनता को लूटा है अतः उत्तर प्रदेश सहित सभी प्रांतों में उत्पादन, पारेषण और वितरण के क्षेत्र में कार्य कर रही सभी निजी कंपनियों का तत्काल सीएजी आडिट कराया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सीएजी के अनुसार दिल्ली में निजी वितरण कंपनियों ने उपभोक्ताओं पर 8000 करोड़ रु से अधिक का बेजा बोझ डाला, अपने ही ग्रुप की कम्पनियों से काफी महँगी बिजली खरीद दिखाई, सामान क्रय में भी बढ़ी कीमत दिखाई गयी और सारा बोझ हर वर्ष टैरिफ बढाकर आम जनता पर डाला गया। उन्होंने कहा अनियमितताओं के चलते ओडिशा की तीनों निजी वितरण कम्पनियों के लाईसेंस रद्द किये जा चुके हैं, औरंगाबाद, कानपुर और जलगाँव के फ्रेंचाइजी करार निरस्त किये जा चुके हैं, अतः बेहद गम्भीर अनियमितताओं के उजागर होने के बाद दिल्ली की निजी वितरण कंपनियों के लाईसेंस तत्काल रद्द किया जाना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि इतने बड़े घोटाले नियामक आयोग की मिलीभगत के चलते संभव नहीं है, अतः केंद्र व राज्य सरकार को नियामक आयोग को रिटायर्ड नौकरशाहों की चारागाह बनने से बचाने के लिए योग्य विशेषज्ञों को नियुक्त करना चाहिए।
उप्र में सरकारी क्षेत्र की तुलना में रोजा और बजाज के बिजली घरों से दोगुने से भी अधिक दाम पर बिजली खरीद पर सवाल खड़ा करते हुए उन्होंने कहा कि इन बिजली घरों का सीएजी आडिट कराया जाये तो दिल्ली घोटाले से भी बड़ा घोटाला सामने आएगा। आगरा फ्रेंचाइजी का सीएजी आडिट कराया जाये तो कई हजार करोड़ का घोटाला सामने आएगा। उन्होंने कहा कि निजी घरानों से दो गुने दाम पर बिजली खरीद और आगरा में निजी कम्पनी को आधे दाम पर बिजली देने से पावर कार्पोरेशन को प्रति वर्ष लगभग 4000 करोड़ रु का नुकसान हो रहा है जिसे सीएजी आडिट के बाद ही रोका जा सकता है। सीएजी आडिट के बाद आम उपभोक्ता पर डाला गया बेजा बोझ भी हटाकर टैरिफ कम किया जा सकता है।