मे. मेकान लि0 को बिजली उपकेन्द्रों व कार्यालयों में प्रवेश नहीं करने देंगे विद्युत कर्मचारी
लखनऊ। गाजियाबाद, मेरठ और वाराणसी शहरों की विद्युत विभाग की चल रही निजीकरण की प्रक्रिया के विरोध में सभी ऊर्जा निगमों के तमाम बिजली कर्मचारी व अभियन्ता 22 सितम्बर को प्रान्तव्यापी विरोध दिवस मनायेंगे। विरोध दिवस के अंतर्गत सभी ऊर्जा निगमों के तमाम कर्मचारी व इंजीनियर प्रदेश भर में जिला,परियोजना मुख्यालयों और राजधानी लखनऊ में विरोध सभाएं और प्रदर्शन करेंगे व लखनऊ में शक्ति भवन, मध्यांचल और लेसा सहित सभी दफ्तरों व बिजली उपकेन्द्रों के कर्मचारी व अभियन्ता शक्ति भवन मुख्यालय पर अपराह्न 03 बजे से विरोध सभा व प्रदर्शन करेंगे
संघर्ष समिति के प्रमुख पदाधिकारियों शैलेन्द्र दुबे, डी सी दीक्षित, गिरीश पाण्डे, चंद्रप्रकाश अवस्थी बब्बू, सदरुद्दीन राना, गिरीश चन्द्र शर्मा, राजेन्द्र घिल्डियाल, भगवान मिश्र, पूसे लाल, विमलेश कुमार और ए के श्रीवास्तव ने आज यहाँ बताया कि निजीकरण की प्रक्रिया समझौते का उल्लंघन है अतः संघर्ष समिति निजीकरण हेतु डेटा एकत्र करने के लिए पावर कारपोरेशन के सलाहकार मेसर्स मेकान लि0 के लोगों को किसी बिजली उपकेन्द्र या कार्यालय में प्रवेश नहीं करने देगी और जोर जबरदस्ती होने पर बिजली कर्मचारी व इन्जीनियर तत्काल काम बन्द कर देंगे। उन्होंने बताया कि निजीकरण की प्रक्रिया का पुरजोर विरोध किया जायेगा और यदि प्रबन्धन ने दमनकारी कदम उठाये तो इसकी तीखी प्रतिक्रिया होगी तथा संघर्ष समिति सीधी कार्यवाही करने को बाध्य होगी। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि पावर कारपोरेशन प्रबन्धन ने निजीकरण की प्रक्रिया प्रारम्भ कर संघर्ष समिति को 28 मई’13 और 11 फरवरी’ 14 को दिये गये लिखित आश्वासन का उल्लंघन किया है। उल्लेखनीय है कि प्रबन्धन ने स्पष्ट तौर पर लिख कर दिया था कि गाजियाबाद, मेरठ, कानपुर और वाराणसी के निजीकरण हेतु प्रदेश सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया है तथा ऊर्जा क्षेत्र में सुधार सम्बन्धी फैसला कर्मचारियों, अवर अभियन्ताओं एवं अभियन्ताओं को विश्वास में लेकर किया जायेगा। उन्होंने बताया कि उक्त समझौते के विपरीत पावर कारपोरेशन ने मे. मेकान लि0 को सौंपे पत्र में लिखा है कि पब्लिक प्राईवेट पार्टनरशिप (पी पी पी) के जरिये इन शहरों की बिजली वितरण व्यवस्था के सुधार पर अपनी रिपोर्ट दे। यह साफ तौर पर निजीकरण की प्रक्रिया है जिसे कदापि स्वीकार नहीं किया जायेगा।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि गाजियाबाद और मेरठ जैसे शहरों के निजीकरण की प्रक्रिया शुरू की गयी है जब कि इन शहरों की लाइन हानियां 15 प्रतिशत से कम हैं। पावर कारपोरेशन की सकल लाइन हानियां 27 प्रतिशत है। इससे स्पष्ट है कि घाटे के नाम पर मुनाफा कमा रहे शहरों का निजीकरण किया जा रहा है जिससे पावर कारपोरेशन का घाटा और बढ़ेगा जिसे अन्ततः टैरिफ बढ़ाकर आम जनता से वसूला जायेगा। पावर कारपोरेशन इस कार्य हेतु मे. मेकान को 4.0 करोड़ रू से अधिक दे रहा है। इसे भी आम जनता से ही वसूला जायेगा।
संघर्ष समिति ने निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल वापस लिये जाने की मांग करते हुए कहा है कि यदि निजीकरण वापस न लिया गया तो सभी ऊर्जा निगमों के तमाम कर्मचारी व अभियन्ता और तेज प्रान्त व्यापी आन्दोलन शुरू करने हेतु बाध्य होंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रबन्धन की होगी।