एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास

कोलकाता। बंगाल में आधार संकट गहरा गया है। कोलकाता, हावड़ा और कूच बिहार जिले में अब रसोई गैस के लिये नकद सब्सिडी सीधे बैंक खातों के जरिये मिलेगी। पहली नवंबर से यह योजना लागू हो जायेगी। लेकिन नकद सब्सिडी आधारकार्ड धारकों को ही मिलेगी। निराधार नागरिकों को नहीं। अब राहत की बात है कि केन्द्र सरकार ने तीन महीने की मोहलत दी है। तीन महीने में आधार हासिल कर लें वरना रसोई गैस बाजार दरों पर ही मिलेगी। फिर आधार कार्ड हासिल करने पर ही नकद सब्सिडी मिलेगी।

आधार निराधार के पैमाने से शुरुआत रसोई गैस से हो रही है, देर सवेर दूसरी नागरिक सेवायें भी निलम्बित होंगी। समस्या यह कि आधार कार्ड बनवाने का काम सरकारी और गैरसरकारी कारपोरेट कंपनियों के हाथों में हैं। नागरिकों के हाथों में नहीं। बंगाल भर में आधार कार्ड बनवाने का काम बहुत सुस्त है। नौ करोड़ लोगों में से एक करोड़ को भी आधार कार्ड नहीं मिला। जनसंख्या रजिस्टर के तहत कब आधार पंजीकरण होगा, कोई जनता नहीं। ऐसे में सरकारी बंदोबस्त की खामियों का खामियाजा आम नागरिक और उपभोक्ता को क्यों भुगतना है, यह समझ से परे है।

आधार प्राधिकरण बाकी दूसरे राज्यों में खुद आधार कार्ड बनवाने का काम कर रहा है लेकिन उस सूची में बंगाल नहीं है। यहाँ आधार आयोजन विशुद्ध कॉरपोरेट रहा है और वह इन्तजाम भी चुनिन्दा इलाकों में। ज्यादातर लोगों को आधार मुसीबत के बारे में ठीक से मालूम भी नहीं है।

आधार कार्ड बनवाने का काम जनगणना विभाग के जिम्मे है जो ज्यादातर इलाकों में शुरु ही नहीं हुआ है और न कॉरपोरेट आयोजन के आयोजक आधार प्राधिकरण और जनगणना विभाग के बीच कोई तालमेल है।