नूरजमाल बाइज्ज़त रिहा
नूरजमाल बाइज्ज़त रिहा
निर्दोष वनगुजर नूरजमाल की गिरफ्तारी के विरोध में वनगुजर व टांगिया महिलाओं ने किया थाने पर कब्जा
-रजनीश
दिनांक 29 जून 2011 को राष्ट्रीय वन-जन श्रमजीवी मंच के निर्दोष वनगुजर नेतृत्वकारी नूरजमाल की गिरफ्तारी के विरोध में वनगुजर व टांगिया गांवो की महिलाओं की अगुआई मे करीब 500 लोगों ने उ0प्र0 के जनपद सहारनपुर की बेहट तहसील के अंतर्गत आने वाले थाना बिहारी गढ़ का घेराव कर तालाबंदी करके कामकाज को ठप्प कर दिया और यूपी पुलिस को बैकफुट में धकेलकर नूरजमाल को बिना किसी शर्त के बाइज्जत रिहा करने को मजबूर कर दिया।
गत 28 जून को उत्तराखंड राजाजी नेशनल पार्क के अन्तर्गत आने वाली मोहन्ड रेंज की झूठी तहरीर पर उ0प्र0 के थाना बिहारीगढ़ की पुलिस ने वनगुजर समुदाय के तीन लोगों नूरजमाल, जहूर हसन व इरशाद के खिलाफ धारा 332, 186 और 427 के तहत मुकदमा कायम कर नूरजमाल को गिरफ्तार कर लिया था। इससे पूर्व 24 जून को जब ये तीनों लोग पार्क क्षेत्र में बसे अपने डेरे पर जा रहे थे तब मोहन्ड रेंज के रेंजर महावीर सिंह नेगी ने रास्ते में रोक लिया और बिना वजह बताये मारपीट शुरू कर दी। इरशाद अपनी जिस मोटर साईकिल पर जा रहा था उसे छीन लिया गया और धमकी दी कि अगर जंगल क्षेत्र छोड़कर बाहर नहीं गये तो गोली से उड़ा दिये जाओगे। मामला उत्तराखंड के बुग्गावाला क्षेत्र का होने के कारण रेंजर के खिलाफ थाना बुग्गावाला में इन्होंने तहरीर दी जिस पर कोई कार्रवाई नहीं की गयी। इधर रेंजर महावीर नेगी ने थाना बिहारी गढ़ के थानाध्यक्ष दिगंबर सिंह से सांठ-गांठ करके महिला वनकर्मी बबलेश की ओर से रिपोर्ट दर्ज करवा दी, जिसके आधार पर थाना बिहारी गढ़ की पुलिस नूरजमाल को घर से उठा कर थाने ले आई। नूर जमाल की गिरफतारी को लेकर पार्क क्षेत्र में बसे वनगुजर व वनटांगिया समुदाय के लोगों में आक्रोष फैल गया। जिसके परिणाम स्वरूप राष्ट्रीय वन-जन श्रमजीवी मंच के बैनर तले राज्य स्तरीय वनाधिकार निगरानी समिति की विशेष आमंत्रित सदस्य रोमा व मंच के सदस्य रजनीश, हरीसिंह, विपिन गेरोला, प्रदुम्न के साथ दोनों वनसमुदायों की महिलाओं जैनब, सीता आदि की अगुआई में 500 से अधिक लोगों ने थाना बिहारीगढ़ का जबरदस्त तरीके से घेराव कर लिया। देखते ही देखते महिलाओं ने थाना कार्यालय के दोनो दरवाजों की कुंडी में सांकल फंसाकर पुलिस कर्मियों को यह कह कर कैद कर लिया कि जबतक नूरजमाल को बाईज्जत रिहा नहीं किया जायेगा तब तक अन्दर बंद पुलिस कर्मियों को भी बाहर नहीं निकलने दिया जायेगा। थाना कार्यालय के बाहर का बरामदा एक जनसभा स्थल में तब्दील हो गया और उसमें पड़ी मेज व स्टूल को मंच बनाकर नारे व भाषण दिये जाने लगे। पुलिस बुरी तरह से सकते में आकर मूक दर्शक की तरह सब देखती रही किसी की हिम्मत नहीं पड़ी कि दमन से उपजे इस जनविरोध का सामना कर सके। थानाध्यक्ष ने मामला अपने हाथ से निकलता देखकर पड़ोस के थाना फतेहपुर के थानाध्यक्ष को व पुलिस क्षेत्राधिकारी बेहट को बुला लिया। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने पुलिस क्षेत्राधिकारी को पूर्व की घटना व इसके वनाधिकार कानून के क्रियान्वयन की प्रक्रिया से जुड़े होने की जानकारी जब दी तो उन्होंने मामले की सत्यता को समझकर स्वीकार किया कि थानाध्यक्ष ने एक निर्दोष व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। उन्हें बताया गया कि वनाधिकार कानून के तहत अब किसी भी वन समुदाय को उसकी मर्जी के बगैर वनक्षेत्र से हटाया नहीं जा सकता। इस बारे में नैनीताल उच्च न्यायालय द्वारा वनगुजरों के पक्ष में सन् 2007 में वनाधिकार कानून को संज्ञान में लेते हुये आदेश भी जारी किये जा चुके हैं। लेकिन पार्कप्रशासन द्वारा 2008 में जहूर हसन और नूर जमाल के डेरों को लूट कर आग के हवाले भी किया जा चुका है। पार्क प्रशासन लगातार तरह-तरह के हथकंडे अपना कर वनगुजरों को वनक्षेत्र से भगाने की कोशिशें करता रहता है। रेंजर द्वारा महिला से दिलवाई गयी तहरीर भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने सारी बात को समझते हुये न सिर्फ नूरजमाल को बिना किसी शर्त बाईज्जत रिहा किया बल्कि वनगुजरों की ओर से रेंजर महावीर नेगी के खिलाफ दी गयी तहरीर को लेते हुये इस पर कार्रवाई करने का आश्वासन भी दिया। इसके बाद यहां एकत्रित सभी लोगों का काफिला नूरजमाल को साथ लेकर मोहंड रेंज कार्यालय पहुंचा। यहां लोगों के आने की खबर पाकर पार्क व वन कर्मी पहले से ही भाग खड़े हुये। लेकिन लोगो
ं ने रेंज कार्यालय पर भी प्रदर्शन करते हुए ज़बरदस्त नारेबाजी की और रेंज दफ्तर की दीवारों पर लिख कर चेतावनी दी कि अगर पार्क प्रशासन द्वारा यहां बसे वनगुजर व टांगिया समुदायों का उत्पीड़न करना नहीं रोका गया तो पार्क डायरेक्टर रसैली सहित सभी पार्क कर्मियों के खिलाफ ग्राम समितियों की ओर से वनाधिकार कानून-2006 की धारा 7 के तहत कार्रवाई की जायेगी।
उ0प्र0 में एक ओर प्रदेश सरकार जहां वनाधिकार कानून के क्रियान्वयन को अपना राजनैतिक ऐजेंडा मानकर लगातार स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों और वनविभाग के लिये तरह तरह के सख्त आदेश व निर्देश जारी कर रही है वहीं दूसरी और स्थानीय प्रशासन और पुलिस वन विभाग को वन संबंधी मामलों में सर्वोपरि मानकर उ0प्र0 सरकार की मंशा पर पलीता फेरने में तो लगे ही हुये हैं, पड़ोसी प्रदेश उ0खं0 में भी तमाम जद्-ओ-ज़हद के बाद शुरू की गयी इस ऐतिहासिक कानून के क्रियान्वयन की प्रक्रिया को बाधित कर रहे हैं। जिसका नमूना बिहारी गढ़ की ये घटना साबित हुयी है। राजाजी नेशनल पार्क प्रशासन, उत्तराखंड पुलिस व उत्तर प्रदेश पुलिस की तानाशाही के खिलाफ महिलाओं के नेतृत्व में किये संघर्ष की यह एक बड़ी और महत्वपूर्ण जीत थी।


