नोट बंदी - क्या है “जिद्दी” अखिलेश और “घमंडी” मोदी की जुगलबंदी ?
नोट बंदी - क्या है “जिद्दी” अखिलेश और “घमंडी” मोदी की जुगलबंदी ?
नोट बंदी - क्या है “जिद्दी” अखिलेश और “घमंडी” मोदी की जुगलबंदी ?
हस्तक्षेप डेस्क
नई दिल्ली, 27 नवंबर। अफजाल अंसारी के साथ मंच पर न पहुंचने का समय न निकाल पाने वाले अखिलेश यादव, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने पहुंच गए।
ऐसे समय में जब समूचा विपक्ष नोटबंदी को लेकर सरकार के खिलाफ आक्रामक है, तब अखिलेश यादव का मोदी से मिलन काफी कुछ संकेत देता है।
सैफई राजवंश में पिछले दिनों चले गृह युद्ध के बीच समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव ने आरोप लगाया था कि सपा महासचिव रामगोपाल यादव भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे हुए हैं, इसलिए खुद को बचाने के लिए भाजपा के इशारे पर काम कर रहे हैं। बाद में इस आरोप पर जब रामगोपाल सार्वजनिक रूप से रोए तभी उनकी सपा मेंघर वापसी हो सकी।
शिवपाल यादव ने जो आरोप लगाया था, भले ही वह सच हो या न हो, लेकिन अखिलेश मोदी का मिलन तो कुछ संकेत ऐसा ही दे रहा है।
गाजीपुर में रैली में सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने मोदी को घमंडी और इशारों ही इशारों में अखिलेश को जिद्दी कहा था।
दरअसल अखिलेश का मोदी से मिलन, मुलायम की उसी टिप्पणी का मूक उत्तर माना जा रहा है।
सैफई राजवंश में गृह युद्ध के कारणों में एक बड़ा कारण कौमी एकता दल का सपा में विलय भी था। राजा भैया, अभय सिंह को बगल में लेकर चलने वाले अखिलेश मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद को लेकर जो संदेश देना चाहते हैं, उनका मोदी से मिलन इसी मानसिकता का विस्तार है।
एक दिन पहले ही मुख्तार अंसारी के भाई के साथ मंच शेयर न करने वाले अखिलेश का अगले ही दिन गुजरात मॉडल वाले मोदी से मिलन काफी कुछ बयान कर रहा है।
Uttar Pradesh Chief Minister Akhilesh Yadav arrives in Parliament to meet PM Narendra Modi. pic.twitter.com/LhV6kPoblt
— ANI (@ANI_news) November 24, 2016
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