नोटबंदी- तबाही के कगार पर किसान, न फसल बिक रही न हो रही बुवाई
नोटबंदी- तबाही के कगार पर किसान, न फसल बिक रही न हो रही बुवाई
नोटबंदी- तबाही के कगार पर किसान, न फसल बिक रही न हो रही बुवाई
ग्रेटर नोएडा। भारत सरकार द्वारा बीती 8 नवम्बर को एक हजार व पांच रुपये के नोटबंदी के निर्णायक फैसले से जहां आमजन बैंकों की लाईन में खड़े रहकर नोट बदलने का दंश झेल रहा है, वहीं इसका बुरा असर किसानों पर पड़ता दिखाई दे रहा है।
किसानों की खेती गेहूं की बुआई के लिए तैयार है, मगर सघन सहकारी गोदामों पर हजार व पांच सौ के पुराने नोटों को नहीं लिए जाने के कारण किसानों को खाद्य व बीज नहीं मिल पा रहा है।
किसानों के मुताबिक बीज, खाद्य समय से मुहैया नहीं होने से फसल पछेती होगी, जिसका पैदावार पर काफी असर पड़ेगा। इसी चिन्ता ने किसानों की नींद हवा-हवाई कर रखी है।
गेहूं बुवाई पर भी आया संकट
पांच सौ और एक हजार के नोट बंदी के बाद फसलों के बुवाई का संकट अन्नदाताओं के सामने खड़ा हो गया है।
नोट बंदी के बाद न तो मंडी में किसान अपनी धान की फसल को बेच पा रहे हैं और न ही खेतों में बुवाई के लिए गेहूं के बीज और उर्वरकों की खरीद कर पा रहे हैं। इससे उनकी चिंता बढ़ती जा रही है। नवम्बर का प्रथम पखवाड़ा समाप्त होने को है, लेकिन अब तक किसानों ने गेहूं की बुवाई शुरू नहीं कर पाई है। ऐसा बेवजह नहीं है, इसका कारण पांच सौ और एक हजार के नोट का प्रचलन से बाहर होना है।
मंडी में किसानों ने जब पांच सौ और एक हजार का नोट लेने से मना किया, तो आढ़तियों ने उनकी धान की बिक्री धीमी कर दी।
धान खरीद में आई मंदी के चलते किसानों की धान की फसल भी नहीं बिक पा रही है, जिससे अब किसानों के सामने गेहूं की बुवाई का संकट खड़ा हो गया है। एक-एक दिन उन पर भारी पड़ रहा है।
बुवाई जितनी देरी होगी, उत्पादन भी उतना कम होगा, लेकिन सब कुछ जानते हुए भी वे कुछ नहीं कर सकते हैं। किसान जहां भी उर्वरक और बीज खरीदने के लिए जाते हैं, वहां दुकानदार पांच सौ और एक हजार का नोट लेने से मना कर देते हैं। वहीं जिन किसानों की फसल अभी तक नहीं बिक पाई है, लेकिन जल्द ही गेहूं की बुवाई नहीं की गई, तो उत्पादन में भारी कमी आ सकती है।
देशबन्धु


