नोटबंदी - मोदीजी स्विस बैंक में जमा काला धन वाले 648 लोगों के नाम बताओ
मोदी सरकार द्वारा घोषित नोटबंदी से पैदा हुई आर्थिक अराजकता और जनता को हो रही दुश्वारियों के खिलाफ आम नागरिकों का धरना
मोदी का नोटबंदी का तुगलकी फैसला आम जनता के खिलाफ और बड़े काला धन वालों को बचाने का प्रयास - माकपा
व्यवस्था सुचारू होने तक पुराने नोटों को चलने दिया जाये- माकपा

लखनऊ। मोदी सरकार द्वारा घोषित नोटबंदी से पैदा हुई आर्थिक अराजकता और जनता को हो रही दुश्वारियों के खिलाफ आंबेडकर प्रतिमा, जी .पी. ओ. चौराहा हज़रत गंज, पर भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी ) लखनऊ ज़िला कमेटी के बैनर तले धरना दिया और विरोध सभा की जिसकी अध्यक्षता पार्टी राज्य सचिव मंडल सदयस्य कामरेड मधु गर्ग एवं संचालन पार्टी जिला कमेटी सदयस्य अनुपम यादव ने किया।

धरने के माध्यम से मांग की गई कि जब तक वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो जाती, 1000- 500 के पुराने नोट मान्य किये जाएँ
क्योंकि पगारें नहीं बंट रही, मजदूरी नहीं मिल रही, सामान खरीदना मुश्किल हो गया है। ग्रामीण इलाकों में इसी के नाम पर गरीबों की मेहनत की कमाई की लूटखसोट हो रही है।
सभा को संबोधित करते हुए पार्टी जिला सचिव प्रदीप शर्मा ने कहा कि नोट बंद करने के लिए तीन तर्क दिए जा रहे हैं, पहला अर्थव्यवस्था रेगुलेटेड हो, दूसरा काला धन बाहर आएगा और कला धन वालों को पकड़ा जायेगा और तीसरा नकली नोट चलन से बाहर किये जाएं! लेकिन 500 और 1000 के नोट बंद करने के फैसले पर कुछ ज़रूरी बात जिनपर विचार होना चाहिए। 100 से कम बड़े कॉर्पोरेट घरानों (ख़रब पतियों ) पर बैंक का 12 लाख करोड़ क़र्ज़ है, यह हम सब जानते हैं कि यह पैसा किसी सरकार, मंत्री या बैंक की अपनी सम्पति नहीं है, यह आम जानता की गाढ़ी कमाई का पैसा है, जिसका ब्याज एक लाख चौदह हज़ार करोड़ इस साल बजट में माफ़ कर दिया गया।

अगर सच में मोदी को आम जनता के हित में काले धन की चिंता है तो क्यों यह ब्याज माफ़ किया जा रहा है क्यों यह क़र्ज़ नहीं वसूला जा रहा है ?
उन्होंने आगे कहा कि यह पूरा अभियान विदेशों से काला धन न ला पाने, सबके खाते में 15 लाख का वादा पूरा न कर पाने की नाकामी को छुपाने का प्रयास है। वे जो ब्लैकमनी होल्डर हैं (असली / बड़े वाले ) उनपर कार्यवाही तो दूर आप सुप्रीम कोर्ट तक के पूछने पर उन लोगों के नाम उजागर नहीं करते।
विजय माल्या और ललित मोदी को पैसा लेकर भाग जाने दिया। सारी मुसीबत अगर आम जानता झेल भी लेती है तब भी सवाल वोही रहेगा कि क्यों ? और किसलिए ? इससे आम जनता को क्या मिलेगा ? महगाईं कम होगी ? आमदनी बढ़ेगी ? खाते में 15 लाख आएगा ? शिक्षा, खेती, चिकित्सा में सब्सिडी मिलेगी या मुफ्त हो जायेगा ?

अब यहाँ विचार कीजिये कि यह खेल आखिर है क्या ?
12 लाख करोड़ बैंक का corporates के पास फंसा है, और उन corporates के हितों की रखवाली मोदी सरकार द्वारा उसका व्याज भी माफ़ कर दिया जा रहा है। अब पूँजी के इस बढ़ते संकट से निपटने के लिए बहुत ज़रूरी है कि किसान, मजदूर, खोमचे वाले, पटरी दुकानदार, तीसरी चौथी श्रेणी का कर्मचारी आम महिलाओं और मध्यम वर्ग के पास रखे पैसे को बैंक में एक झटके में जमा कराया जाये जिससे बैंक के पास फिर से पूँजी एकत्र हो और सरकार फिर corporates को कर्ज दिलवा सके।
सभा को संबोधित करते हुए पार्टी जिला कमेटी सदयस्य प्रवीण सिंह ने कहा कि. सबसे ख़राब स्थिति यह है कि करीब पाँच करोड़ लोग खुद और परिवार की बेहद ज़रूरी ज़रूरतों (दवा सब्ज़ी आटा चाय दूसरी खुदरा चीज़ों)के लिये बेवजह सताये गय हैं। वे भोर से बैंकों, पोस्ट आफिसों की लाइनों में खड़े रहे। अपने ही कमरतोड़ मेहनत से कमाए अपने पैसे को अपने ऊपर खर्च करने के लिए भीख की तरह लेने के लिए! इनमें से शायद ही कोई वो हो जिसको पकड़ने के लिये ये नोटबंदी की स्कीम लाई गई है। कितने मजदूर , पटरी दुकानदारों के यहाँ चूल्हा तक नहीं जला उसकी ज़िम्मेदारी कोन लेगा ?

सभा को संबोधित करते हुए कामरेड मधु गर्ग ने कहा कि इस फैसले से आम जनता पिस रही है जिसमें महिलायें प्रमुख हैं।
जनता को असुविधा न हो इसलिए सरकारी और जरूरी स्थानों पर 1000 और 500 के पुराने नोट चलने चाहिए।
उन्होंने कहा कि केरल की वामपंथी सरकार द्वारा लिए गए ऐतिहासिक, साहसी और आम जनता के हित में लिए गए फैसले ने देश को रास्ता दिखाया है।
उन्होंने कहा कि मोदी जी ने 2014 के चुनाव में खुद कहा था कि 90 प्रतिशत से ज्यादा काला धन स्विस बैंक में जमा है। उनके पास उन 648 लोगों की सूची आ गयी है उनपर कार्यवाही कीजिये, उनके नाम सार्वजानिक कीजिये। आम जनता को त्रस्त करने के स्थान पर उनपर कार्रवाई करते तो 90 प्रतिशत काला धन आ जाता।

धरना के माध्यम से मांग की गई कि 31 दिसम्बर तक, जब तक व्यवस्था सुचारू रूप से चलने न लगे, सभी दैनिक उपयोग और जरूरी जगहों पर पुराने नोट चलने की छूट दी जाये।
सभा को अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की जिला सचिव सीमा राना ने कहा कि ऐसे काम नहीं चलने वाला मोदी जी....उस दिन तो बस अपना सन्देश देकर चले गए और देश रुक गया बस 500 और 1000 नोट के बीच .....उस सन्देश में यह भी आना चाहिए था कि काला धन को ट्रेस करने की क्या तकनीक निकाली है। अवाम को कैसे पता चलेगा कि कितनी काला धन आया और सन्देश में यह भी होना चाहिए था की उस काले धन का क्या करेंगे कहीं फिर वही धन कुबेरों के पास चला जायेगा।
उन्होंने कहा कि सन्देश एक बार और देना होगा। दो महीने में जनता परेशान होगी तो उसका नतीजा जानने का हक़ उसे होगा ।
सभा को इसके अतिरिक्त सीटू नेता राहुल मिश्र, रमाशंकर बाजपाई, ऋषि श्रीवास्तव, सुमन सिंह, रियाजुल हक़, धनञ्जय अवस्थी, ओ पी वर्मा, पीयूष मिश्र, छोटेलाल पाल आदि ने भी संबोधित किया।