नोटबंदी से आर्थिक आपातकाल, मोदी बताएं क्यों चलाएं दो हजार के नोट -दिनकर
नोटबंदी से आर्थिक आपातकाल, मोदी बताएं क्यों चलाएं दो हजार के नोट -दिनकर
नोटबंदी से आर्थिक आपातकाल, मोदी बताएं क्यों चलाएं दो हजार के नोट -दिनकर
ऽ 28 नवम्बर को विरोध दिवस में शामिल होगा आइपीएफ
ऽ ‘नोटबंदी का सच‘ विषय पर हुई परिचर्चा
सोनभद्र 25 नवम्बर 2016 : मोदी यदि कालेधन को वापस लाने और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के प्रति ईमानदार हैं तो उन्हें देश की जनता को बताना चाहिए कि आखिर देश में उन्होंने दो हजार के नोट क्यों चलाए?
यह सवाल आज राबर्ट्सगंज स्थित गायत्री लाज में आयोजित ‘नोटबंदी का सच‘ विषय पर आयोजित परिचर्चा में बोलते हुए आइपीएफ के प्रदेश महासचिव दिनकर कपूर ने पूछा।
उन्होंने कहा कि इन नोटों से तो देश में काले धन का संग्रहण और भ्रष्टाचार और भी सुगम होगा। दरअसल प्रधानमंत्री द्वारा की गयी नोटबंदी बड़े पूंजीपतियों को दी गयी टैक्स छूटें और कर्जो को माफ करने के कारण पैदा हुए आर्थिक संकट को जनता के धन से हल करने के लिए है। इस नोटबंदी ने देश में आर्थिक आपातकाल के हालात पैदा कर दिए है।
बिना किसी तैयारी के सरकार द्वारा लिए इस तानाशाहीपूर्ण फैसले से छोटे-मझोले व्यापारी, किसान, मजदूर और आम मध्यम वर्गीय नागरिकों की कमर टूट गयी है।
श्री कपूर ने कहा बड़े पैमाने पर छोट-मझोले उद्योग बंद हो गए, निर्माण, होजरी, सर्राफा जैसे तमाम उद्योगों में पिछले दस दिनों करीब 3 करोड़ मजदूर बेरोजगार हुए है। एक अनुमान के मुताबिक इससे देश की सकल धरेलू उत्पाद (जीडीपी) तक में दो प्रतिशत की गिरावट आयेगी। देश में आम आदमी की छोटी जमा पूंजी पर ब्याज दरें और घट गयी है। महंगाई में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। देश की सप्लाई चेन टूट रही है। किसानी बर्बाद होने से देश में बड़ा खाद्यान्न संकट पैदा होगा।
उन्होंने कहा कि आज आम आदमी का बैकिंग क्षेत्र और सरकार पर ही विश्वास डगमगा गया है।
मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले के खिलाफ आइपीएफ 28 नवम्बर को देश की लोकतांत्रिक व वाम ताकतों के द्वारा आहूत विरोध दिवस के साथ है और सोनभद्र में भी आइपीएफ कार्यकर्ता सड़क पर उतरेगें।
उन्होंने कहा कि यदि मोदी सरकार काला धन लाना चाहती तो वह देश में सत्तासी हजार करोड़ रूपए कर्जो का और लाखों करोड़ों रूपए टैक्सों चोरी करने वाले बड़े पूंजीपतियों के खिलाफ कार्यवाही करतीे, कालें धन को मारीशस के जरिए सफेद करने पर रोक लगातीं, आय से अधिक सम्पत्ति वाले नेताओं और अधिकारियों की सम्पत्ति की जांच करा कर उसे जब्त करती, हवाला के कारोबार पर रोक लगाती पर सच यह है कि डेढ़ साल में भाजपा की सरकार ने इस पर कोई कार्यवाही नहीं की। यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने बड़े टैक्स चोरों और कर्जेदारों के नाम तक बताने से मना कर दिया। खुद कारपोरेट घरानों के करोड़ों-अरबों रूपए के बूते लोकसभा चुनाव लड़े प्रधानमंत्री के मुख से भ्रष्टाचार पर रोक की बात बेईमानी लगती है।
उन्होंने भारत सरकार से मांग की कि अपनी हठधर्मिता छोड़कर तत्काल 31 दिसम्बर तक पुराने नोटों के प्रचलन की छूट देनी चाहिए और इस दौरान पूरी ताकत से जनता को दिक्कत न हो इसके लिए वैकल्पिक तैयारी करनी चाहिए।
परिचर्चा की अध्यक्षता वरिष्ठ नेता सब्बू खां ने की।
परिचर्चा को राजेश सचान, अजंनी पटेल, बलवंत खरवार, राम नारायण, रामेश्वर प्रसाद, सुरेन्द्र पाल, मुहम्मद हनीफ, श्रीकांत सिंह, इंद्रदेव खरवार, महेन्द्र प्रताप सिंह, मनोहर गोंड़, राजाराम भारती, केशों मौर्या आदि ने सम्बोधित किया।


