लखनऊ। नौ साल लापता रहकर अचानक अवतरित होकर यूपी जैसे बड़े सूबे में महत्वपूर्ण पद पर कब्जा करने वाले आईएएस अधिकारी प्रमुख सचिव अवस्थापना एवं ओद्योगिक विकास सूर्य प्रताप सिंह के खिलाफ पत्रकार संजय शर्मा ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर दी है।

संजय शर्मा ने हस्तक्षेप को बताया कि उन्हें इस बात का बहुत आश्चर्य था कि अगर कोई सामान्य कर्मचारी बिना बताये एक साल नौकरी से गायब हो जाता है तो उसे तत्काल बर्खास्त कर दिया जाता है मगर आईएएस के लिये मानो सारे गुनाह माफ़ होते हैं। सूर्य प्रताप सिंह पिछले नौ सालों से गायब थे और जैसे ही वापस आये तो सबसे महत्वपूर्ण पद पर तैनात हो गये। वह सवाल करते हैं कि क्या इनके लिये कोई नियम, कोई संविधान नहीं है? इनसे किसी ने नहीं पूछा कि इतने सालों तक अमेरिका में क्या करते रहे ? खर्चा कैसे चला ? क्या इतने साल बाद वापसी किसी विदेशी इशारे पर तो नहीं हुयी ? अभी भी प्रदेश के कई आईएएस सालों से गायब हैं।

संजय शर्मा की याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई होगी। याचिका में संजय शर्मा ने उच्च न्यायालय से दरख्वास्त की है कि केन्द्र सरकार को भी नोटिस देकर कहा जाये कि इन अफसरों का लेखा जोखा रखने वाले डीओपीटी को निर्देशित किया जाये कि स्टडी लीव पर जाने वाले सभी अफसरों का पूरा विवरण अपनी वेबसाईट पर प्रकाशित करे।

यह बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा है। उत्तर प्रदेश में वैसे भी अफसर कम हैं और यहाँ के अफसर बिना बताये विदेश में सालों तक घूमते हैं जमकर पैसा कमाते हैं और यहाँ आकर बची हुयी तन्खाव्ह भी ले लेते हैं।

संजय शर्मा ने बताया कि उनकी जानकारी के मुताबिक सूर्य प्रताप सिंह को भी इतने सालों की तनख्वाह लगभग एक करोड़ रुपया भी दे दिया जायेगा।

यहाँ सवाल उन हुड़दंगियों से भी है जो सोशल मीडिया और इलैक्ट्रॉनिक मीडिया में भी दुर्गा शक्ति नागपाल को ईमानदारी वाले का पुतला बनाने पर तुले हुये थे, क्या उनका हल्ला अभियान सूर्य प्रताप सिंह के प्रकरण पर भी मचेगा?