अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इण्डिया में केरल के कोची से एम के सुनील कुमार ने रिपोर्ट लिखी थी कि कोची शहर से 30 किमी दूर है किज़ाकंबलम पंचायत जिस पर कांग्रेस का कब्ज़ा है। इस पंचायत ने 1000 करोड़ टर्नओवर की एक कपड़ा कंपनी को अपनी पंचायत में परमानेंट लाइसेंस नहीं दिया। पंचायत का कहना है कि कंपनी का प्लांट प्रदूषण पैदा करता है, कंपनी कहती है कि राज्य प्रदूषण बोर्ड ने नो आब्जेक्शन सर्टिफिकेट दिया है।
मामला अदालत में है, लेकिन 8000 कर्मचारियों वाली यह कंपनी पंचायत में उतर गई है। इस साल होने वाले पंचायत चुनावों में सभी 17 वार्डों के लिए अपना उम्मीदावर उतारने जा रही है। इसके लिए कंपनी ने गांव के लोगों के बीच दो साल में 28 करोड़ रुपये खर्च दिये, जबकि पंचायत चार साल में 22 करोड़ ही खर्च पाई। छात्रों से लेकर मरीज़ों तक की मदद की और पीने के पानी का प्लांट लगाने से लेकर सड़कें बेहतर कर दी।
पंचायत के 77 फीसदी सदस्‍य कंपनी की सुविधा लेने के लिए रजिस्टर्ड हो चुके हैं और वाम दलों के कार्यकर्ता भी कंपनी का बैज लगाकर घूम रहे हैं।
राजनीतिक दलों में कॉरपोरेट घुस गया, उसके खतरे हम देख भी रहे हैं और नहीं भी देख रहे हैं, लेकिन ग्राम सभा के स्तर पर ऐसी घुसपैठ हो गई तो भूमि अधिग्रहण कंपनी के मुताबिक होने लगेगा। पंचायत के अधिकार कंपनी के हाथ में आ सकते हैं।
नीरज दीवान
नीरज दीवान, टीवी पत्रकार हैं।
नीरज दीवान की फेसबुक टाइमलाइन से साभार