पगड़ी संभाल जट्टा ..
पगड़ी संभाल जट्टा ..
अमेरिकी मन मिजाज का जवाब नहीं । अक्ल के कोरे हैं । बेचारे दिल्ली के बस कंडक्टरों की बोली में छोरे हैं । अमरीकी सिनेमा में न जाने कितने बहादुर दिखाए जाते हैं । असल में यह बेवकुफों की एक जमात है । अब इन्होने पगड़ी को छेड़ा है । साड़ी से मन नहीं भरा , अब पगड़ी में उन्हें बम छिपा दिखता है । अमेरिकी मन मिजाज को हर तरफ खतरा ही खतरा दिखता है । दरअसल रोज ही वह पगड़ी उछालते हैं । रोज ही साड़ी टटोलते हैं । जिनकी पगड़ी उछालते हैं , वह धन्य हो जाते होंगे । आपस में बात करते होगे कि देख कित्ता भाव दीना गोरा बाउजी ने – पगड़ी खुलवा ली । होय पगड़ी में कुछ था ही नहीं , जो था मेरे हाथ में । हाथ देखता तो उसे पत्ता चलता कि ठेठ पंजाब दा गन्ना दा गुड़ है । पर इस बार जिनकी पगड़ी देखनी चाही , वह एनआरआइ वाला सरदार नहीं था । एनआरआइ वाले सरदार का वाहे गुरु अमेरिका है । यह सरदार सरकार वाला था । सरकार में भी डिप्लोमैट बिरादरी का । अड़ गया तो अड़ गया ।
बात बहुत छोटी है । पर बहुत मोटी है । अमेरिका हवाई अड्डे पर पूरी सुरक्षा चाहता है । पूरी दुनिया को सुरक्षा करने वाला अपनी सुरक्षा से परेशान है । इसलिए परेशान है कि पूरी दुनिया को परेशान करने के बाद जब अपने ऊपर पड़ी तो हलकान है । वो एक गाना है ना कि चोरों को सारे नजर आते हैं चोर । वही हाल अमेरिका का है कि हर आदमी आतंकवादी दिखता है । अमेरिका आतंकवादी पालता है । जब पालता है तो पता भी नहीं चलता कि वह पाल रहा था । आतंकवादी जब दुनिया में कहीं भी ,खास कर भारत में जब अपनी करामात दिखा देता है तो अमेरिका को पता चलता है कि अरे , यह तो आतंकवादी था । हेडली का किस्सा ताजा ताजा ही है । उसे हम अपने देश नहीं ला सकते । अमेरिकी नागरिक जो ठहरा । आखिर अमेरिका हमारा मालिक जो ठहरा ।
हमारे विदेश मंत्री तो ऐसी घटना पर बड़े खुश होते होंगे । चलो इसी बहाने प्रेस से मिलिए हो जाता है । सख्त कार्रवाई करेंगे जैसी कुछ बात बोल देते हैं । इस बार कभी डिप्लौमेट रह चुके टाइप की दुखी आत्माओं ने कहा कि अमेरिका को भी तैयार रहना चाहिए कि हम उसके डिप्लोमैटों की भी ऐसी की तैसी करेंगे । यह हमारे विदेश सचिव का बयान नहीं होता । पूर्व डिप्लोमेटों का होता है । उसमें से भी व्याकुल भारत टाइप मणिशंकर अय्यर का नहीं होता । सबको अमेरिका जाना है । जैसे हमें हरिद्वार जाना होता है । मैली हो चुकी गंगा में पवित्र होने के लिए नहाना होता है ।
कुछ तो अमेरिका में पढ़े होते हैं । कुछ अमेरिका की दाल रोटी खा रहे होते हैं । किस मुंह से बोलेंगे । अमेरिकी जैसा देश भक्त नहीं होता । छेड़ कर देखो जरा किसी अमेरिकी डिप्लोमैट को , दाना पानी बंद करा देगा । विजा ही नहीं देगा । बेकार बना देगा । अभी तक तो इतनी ही शराफत है कि आपके राजदूत मीरा शंकर की साड़ी वहां की सफाईकर्मी नुमा महिला उतरवाती है । आपके संयुक्त राष्ट्रसंघ के स्थायी प्रतिनिधि को हवालात नुमा जगह में बिठाया जाता है । आपके मंत्रियों की ऐसी की तैसी तो करता ही रहता है ।
इसीलिए कभी कहा गया था , पगड़ी संभाल जट्टा …हम कहां संभालते हैं अपनी पगड़ी …


