मोदी सरकार आने के बाद पत्रकारिता बहुत अपमानजनक पेशा होता जा रहा है
नई दिल्ली। केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद पत्रकारिता बहुत अपमानजनक पेशा होता जा रहा है, सरकार और उसके अधिकारी पत्रकारों को कदम-कदम पर बेइज्जत करने का काम कर रहे हैं। आजादी के बाद पहली बार देश में ऐसा हुआ कि पत्रकारों को बजट की कापी ही नहीं दी गयी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पीआईबी के अधिकारियों ने पत्रकारों को इस संबंध में बताया कि वित्त मंत्रालय ने पत्रकारों के लिए कापी भेजी ही नहीं, जबकि सांसदों को दी गयी। पत्रकारों को 11.30 बजे इसकी जानकारी एसएमएस पर दी गयी।
वरिष्ठ पत्रकार विमल कुमार के मुताबिक सरकार का तर्क है कि कागज़ को बचाने के लिए ऐसा किया गया। विमल कुमार कहते हैं अगर कागज़ ही बचाना जरूरी है तो अरुण जेटली भी लैपटॉप से बजट पढ़ते और सांसदों को भी कापी नहीं दी जाती, लेकिन सच यह है कि सरकार पत्रकारों को परेशान कर रही है वह चाहती है कि पत्रकार को खबर देने में दिक्कत हो, तथ्य छुपाये जाएँ।
सरकार के इस कदम पर सारे पत्रकार नाराज़ थे। कई पत्रकारों ने सांसदों से बजट कीकापी मांग कर खबर बनाई। पीआईबी की वेबसाइट से देखकर उतने मोटे बजट से खबर बनाना प्रिंट, खासकर एजेंसी के लिए मुश्किल है। बीच में वेबसाइट भी नहीं खुल रही थी। इसके चलते समाचार एजेंसियों की ख़बरें भी देर से अपलोड हुईं।
विमल कुमार कहते हैं,

“बहरहाल ये तुगलकी फैसले सरकार में बैठे लोग लेते रहते हैं.. हमारी नौकरशाही लोगों को परेशान करने के लिए है....पत्रकारिता बहुत अपमानजनक पेशा होता जा रहा है आज संसद में यही महसूस हुआ... कई नेताओं को कहा, पर कोई असर नहीं ...”