पाकिस्तान फिर टूटेगा और इसे अंदरूनी ताकतें ही तोड़ेंगी और भारत को संघ तोड़ेगा
पाकिस्तान फिर टूटेगा और इसे अंदरूनी ताकतें ही तोड़ेंगी और भारत को संघ तोड़ेगा
चंचल
कौन दुश्मन है ?
दुश्मन बहुत टेढ़ा शब्द नहीं है, न ही कोई बिगड़ी हुयी क्रिया है, लेकिन पहचान तो सही हो।
भारतीय सड़े समाज में जब भी दुश्मन की बात आएगी, पाकिस्तान का नाम सबसे पहले चलेगा, ठीक उसी तरह जैसे पाकिस्तान में भारत का नाम। दोनों जगह यह चक्र गलत चल गया है। पाकिस्तान दो हैं, जैसे भारत दो हैं। पाकिस्तान में यह रेखा कुछ ज्यादा ही गाढ़ी हो गयी है। एक अवाम है, दूसरी सरकार है।
अब ज़रा गौर से पाकिस्तान का तानाबाना देखिये।
अवाम का कौन सा हिस्सा सरकार को या पाकिस्तान को शिद्दत से अपना मुल्क मानता है ?
इतिहास देखिये। बँटवारे के समय सिंध और बलूच ने अपने को भारत के साथ रहने की इच्छा जाहिर की थी। लेकिन अंग्रेज बहादुर ने इनकी एक न सुनी और जबरन दोनों सूबों की सरकार को गिरा कर इसे पाकिस्तान में शामिल कर दिया। आज भी सिंध और बलूच उसकी सजा भुगत रहे हैं।
पाकिस्तान फिर टूटेगा और इसे बाहरी ताकत नहीं अंदरूनी ताकतें ही तोड़ेंगी।
इसमें कठमुल्ले, आतंकी और तानाशाही मानसिकता वाले सैनिक उत्प्रेरक का काम करेंगे। ठीक उसी तरह जैसे भारत में संघ खेल करता रहता है। दोनों मुल्कों की मौजूदा स्थिति कमोबेश एक सी हो रही है। शुक्र मनाइये कि आजादी के बाद देश की बागडोर कांग्रेस के हाथ रही और पंडित नेहरु जैसा नेता मिला।
आज भारत पाक एका की शुरुआत करने की जरूरत है।
भारत, पाक, बांग्लादेश, नेपाल एक महासंघ बने और इन समस्यायों को एक साथ मिल कर सुलझाया जाय।


