पूँजीवाद स्वयं संकट में हैं, निवेश कहाँ से करेगा - प्रोफेसर प्रभात पटनायक
पूँजीवाद स्वयं संकट में हैं, निवेश कहाँ से करेगा - प्रोफेसर प्रभात पटनायक
पूँजीवाद स्वयं संकट में हैं, निवेश कहाँ से करेगा - प्रोफेसर प्रभात पटनायक
लखनऊ। प्रख्यात अर्थशास्त्री प्रोफेसर प्रभात पटनायक ने कहा है कि पूँजीवाद स्वयं संकट में हैं, लेकिन वह सरकारों से कहता है कि उन्हें रियायत दी जाये तो वह निवेश करेंगे, जिससे विकास होगा। इस छलावे में आकर सरकार तमाम सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनायों शिक्षा, हेल्थ आदि से फण्ड काटकर पूंजीपतियों को करोड़ो रूपये क़र्ज़ माफी और राहत दी जा रही है। लेकिन मंदी के संकट में फंसा पूंजीवाद निवेश करने की हालत में ही नहीं है, विकास की बात दूर। और इस कटौती से आम जनता त्रस्त होती जा रही है ।
प्रोफेसर प्रभात पटनायक श्रमिक संगठन सीटू Citu के 13 वें राज्य सम्मेलन की तैयारियों के क्रम में "भूमंडलीकरण के दौर में ट्रेड यूनियन की भूमिका" विषय पर संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के तौर पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे।
संगोष्ठी का आयोजन, सीटू स्वागत समिति और जन विचार मंच lucknow के सहयोग से किया।
प्रोफेसर प्रभात पटनायक ने कहा कि भूमंडलीकरण के दौर में पूँजी कहीं भी जाने के लिए स्वंतंत्र है, लेकिन मजदूर नहीं। उन्होंने कहा कि पूँजी का यह चरित्र है कि वह वहीँ जाती यहाँ प्रतिरोध कम हो।
भूमंडलीकरण और उदारीकरण ने गरीबी को बेतहाशा बढ़ाया
प्रोफेसर पटनायक ने कहा भूमंडलीकरण और उदारीकरण ने गरीबी को बेतहाशा बढ़ाया है। उन्होंने नेशनल सैम्पल सर्वे के आधार पर बताया कि 1992 में गावँ में ज़िंदा रहने के लिए जो पोषक भोजन की ज़रुरत थी, उससे नीचे 58 प्रतिशत जनता रहती थी, जो आज बढ़कर 68 प्रतिशत हो गयी है।
उन्होंने कहा कि बेरोज़गारों की फ़ौज ट्रेड यूनियन आंदोलन को आगे बढ़ने में बाधक है ।
प्रोफेसर पटनायक ने कहा कि पूंजीवादी व्यवस्था गहरे संकट में है, और जनता की मूलभूत समस्यओं का अंत व्यवस्था परिवर्तन से ही संभव है। उन्होंने कहा व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई को मजबूत करने के लिए ट्रेड यूनियन आंदोलन को मजबूत होना बहुत जरूरी है, जिसके लिए ट्रेड यूनियन आंदोलन को आम जनता के सवालों को भी प्रमुखता से उठाना होगा ।
उन्होंने कहा इस लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए right to food , right to health , right to education ,right to employment की मांगों को उठाते हुए मजबूत आंदोलन बनाना होगा ।


