पूंजी की लूट खसोट को कवच देने के लिए देश को खतरे में डाल रही सरकार
पूंजी की लूट खसोट को कवच देने के लिए देश को खतरे में डाल रही सरकार
मधुवन दत्त चतुर्वेदी
आम चुनाव के बाद देश के विभिन्न भागों में छोटे बड़े सांप्रदायिक दंगों की घटनाएँ तेजी से बढ़ी हैं। उत्तर प्रदेश में कुछ विशेष तौर पर। सभी जगह संघ-बीजेपी के लोगों की भूमिका रही है। गोधरा को भूलने पर मुजफ्फर नगर की याद दिलाने वाला बयान इसकी स्वीकारोक्ति है। प्रधान मंत्री सांप्रदायिक विद्वेष पर चुप हैं लेकिन उनके सहयोगी लगातार विष वमन कर रहे हैं। चाहे सिंघल हों, तोगड़िया हों, विचारे हों, बिधूड़ी हों, सोम हों या प्राची हों, या फिर वे भक्त जन जिन्हें मंगाई एफ डी आई और पाकिस्तान द्वारा सीमा पर युद्ध विराम की घटनाओं पर सांप सूंघ जाता है, सांप्रदायिक विद्वेष को हवा देने का काम बिना रुके किये जा रहे हैं।
यह घटनायें एक सुनियोजित षड़यंत्र के अंतर्गत हो रही हैं। ये अखिल भारतीय स्तर की किसी बड़ी सांप्रदायिक घटना की व्यूह-रचना का भाग हैं।
कार्पोरेट और विदेशी पूंजी के समक्ष साष्टांग समर्पित मोदी सरकार के प्रति जनता के असंतोष जब अपने उत्कर्ष पर आने की स्थिति में होगा तभी इन छुटपुट प्रयोगों से तैयार की जा रही बारूदी सुरंगों को संघी पलीता दिखायेंगे। यह राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए अत्यंत घातक स्थिति होगी। पूंजी की लूट खसोट को कवच देने के लिए उनके हितों के समक्ष सरकार के समर्पण को बचाए रखने के लिए आम नागरिकों को धार्मिक उन्माद में झोंक कर यह सरकार देश और देश की जनता को खतरे में डाल रही है।
इस साजिश को उन सब लोगों को समझना होगा जो देश और इसकी जनता से प्रेम करते हैं और ऐसा विकास चाहते हैं जिसमे जनता के गरीब और मध्यम तबकों का कल्याण हो ।
सांप्रदायिक गतिविधियों का हर स्तर पर विरोध कीजिये। भारतवासियों में प्रेम और सद्भाव बनाये रखने का हर संभव प्रयास हर स्तर पर कीजिये। साहित्य और संस्कृति के उन पहलुओं को उभारिये जिनसे मानवीय संवेदनाओं और बंधुत्व का भाव बढ़ता है। इस सरकार की जन विरोधी नीतियों के विरुद्ध मुखर होइये और सक्रिय प्रतिवाद कीजिये। वर्तमान सन्दर्भ में यही इस देश और देशवासियों की सबसे बड़ी सेवा होगी।


