प्रचण्ड माया
पवन पटेल

जनता के नाम पर
जंगे माया बनती है प्रचण्ड
अवसर की दुधारी तलवार से
वार करती चौतरफा.

जनता के नाम पर
जंगे माया बनती है प्रचण्ड
कभी जला रोल्पाली आग
करती भस्म शाही लंका
बनाने एक नयी लंका
राम के संरक्षण में
बन लंकाधीश.

जनता के नाम पर
जंगे माया बनती है प्रचण्ड
भोगने लंका की माया
ले अगल बगल हनुमानों की टोली
रामनामी दिव्य किरणों से सुशोभित.

जनता के नाम पर
जंगे माया बनती है प्रचण्ड
कभी ले आग दोआब के उर्वर मैदानों से
भारदारों के बूटों तले घुटती मूक वेदनाओं से सिंचित
सदियों के लहू पसीने से निर्मित
ध्वस्त करने लंका में बसे
गोर्खाली उपनिवेश को
बन कर राम का सच्चा विभीषण.

जनता के नाम पर
जंगे माया बनती है प्रचण्ड
करती दो नावों की सवारी
प्रायः दक्षिण की
कभी कभार उत्तर की भी
इतिहास से सीख ले
अवसर के मुताबिक.

जनता के नाम पर
जंगे माया बनती है प्रचण्ड
बजाती राष्ट्रवाद का डंका
करती तब्दील राम की रांका को
२१ वीं सदी के लैंडुपों की लंका में
पैदा करते जाने
अवसर के होली संस्करण
सजाकर दीप चीनी मिटटी में
कर अर्पित सुर्ख फूल कमल के
जन-गण-मन विरोधी फूल
मनाने दीपा-ओली रक्त रंजित
ओम संसार के मजदूर एक हौंओं!
ओम हाम्रो राजा प्राणभन्दा प्यारो!!

जनता के नाम पर
जंगे माया (जरूर) बनती है प्रचण्ड
पर जंगे माया करती रही थी
एक नाव की सवारी मात्र
बनकर अंग्रेजों का बहादुर कुत्ता
प्रचण्ड माया करती है
दो नावों की सवारी एक साथ
करने पैदा बहादुर कुत्तों की शेर नस्लें
क्यूंकि प्रचण्ड माया न तो
पूर्णतया बुर्जुवा बन पायी है
और न ही कम्युनिस्ट.

प्रचण्ड माया मात्र जन्माती हैं
पराधीन कौमें.

.....(5 मई 2016 दोपहर ; नयी दिल्ली)