प्रभु के संकेत-निर्देश पर हृदय परिवर्तन हो गया है सईद का
प्रभु के संकेत-निर्देश पर हृदय परिवर्तन हो गया है सईद का
मधुवन दत्त चतुर्वेदी
प्रभु आगमन की प्रतीक्षा में आतुर था सुदामा।
रोज दंड पेल रहा था। रोज लकुटिया से बरैटी फिरा रहा था। यों तो प्रभु की सरकार आने के बाद दाल रोटी सब्जी सभी मंहगे हो गए हैं, पर फिर भी सुदामा ने पाव भर दूध खरीदना शुरू कर दिया था। आसानी से कर भी लिया था। ब्राह्मणी और सुदामा दोनों ने तय कर लिया, रोटी दो-दो ही खाया करेंगे। एक सब्जी बना लेंगे। दोनों छाक वही चला लेंगे। पर दही जरूर जमायेंगे।
पंडितानी के लिए एक बिलोनी और मलैया लेके जब उस दिन सुदामा पहुंचा था तो चोंक गई थी बेचारी। कहने लगी-ये बुलेट ट्रेन क्यों खरीद लाये हो स्वामी ? गऊ दान मिला है क्या ? मिला भी है तो कहाँ बंधोगे, सानी-पानी कैसे होगी। इस मड़ैया में अपने पाँव पसारने को तो ठौर है नहीं, फिर उसे कहाँ रखोगे ?
शांत सुदामा ने स्वाभिमानी मुद्रा में कहा था- गऊ गोबर की चिंता मत कर। अमूल का दही लाऊंगा। प्रभु प्रदेश में निर्मित। तू बिलोना। छाछ मैं पियूँगा। लोनी तू और बच्चे प्रभु प्रसाद समझ कर पा लेना। जानती भी है तू, छाछ की शक्ति ? कंस वध के बाद लोग कहने लगे थे कि छाछ के पिवैयन ने छत्रपति मारयौ है। फिर गिरा गंभीर कर उच्च स्वर में बोला ताकि पड़ोसी भी सुन लें-अब अंत आ गया पापी पाकिस्तान का। प्रभु आ जायें बस ब्रिक्स से, फिर देखना क्या होगा ? अबके नवम्बर से पहले पहले बम्बई पर हमला कराने वाला हाफिज़ सईद बम्बई की जेल में ठूँसना है। पाकिस्तान के हलक में हाथ डालकर निकाल लायेंगे राक्षस को। ताकत चाहिए न। सो अमूल दूध की छाछ पियूगा, दंड पेलूँगा और बरैटी तो तू जानती है, मैं निष्णात हूँ। बस आने दे प्रभु को।
कहते-कहते पूरा ऐंठ गया था सुदामा का शरीर।
पड़ोस की झोंपड़ी में चिलम लगा रहे झमकू तक के रोंगटे खड़े हो गए थे सुदामा की ललकार से। वाम अंग फड़क उठा था।
आज लौटा सुदामा मुदित मन कि कल राष्ट्र-ऋण के भुगतान का दिन होगा। भिक्षा भी खूब मिली थी संयोग वश। दो चार दिन ब्राह्मणी का गुजारा हो लेगा। तब तक में इस्लामाबाद में ताल ठोक कर आ ही जाऊँगा।
घर आते ही ब्राह्मणी ने आरती उतारी। बलैंयाँ लीं, मुख चूमा। असाधारण लाड़ देख कर बुझ गया सुदामा। अप्रत्याशित सुख भी चौंकाता है न ? पूछा तो मिसरी सी बोली-अब प्राणनाथ को इस्लामाबाद नहीं जाना है न !
-क्यों ?
-क्योंकि हाफिज सईद को लाना नहीं है। वह खुद ही आयेगा। प्रभु के संकेत-निर्देश पर वेद प्रकाश वैदिक जी हो आये वहां। हृदय परिवर्तन हो गया है उसका। तीर्थाटन पर शीघ्र आयेगा ऐसा आश्वस्त किया है। पतंजलि और नागपुर में स्वागत की तेयारी प्रारंभ भी हो गयीं हैं।
-धन्य हैं प्रभु ! चमत्कारी हैं , अवतारी हैं। कहता था न मैं कल्याणी तुमसे। पर मूर्ख प्रजाजन समझते ही नहीं।
सुदामा की मड़ैया में हुए वार्तालाप की अमृत धारा झमकू के भी कान में पहुची। चिलम तक चटक गयी हाथों के आक्रोश से। फिर सिहर उठा बेचारा।
उधर सुदामा प्रभु की गर्वीली छवि के समक्ष साष्टांग पड़ा था।


