रोहतास के बड़ी गांव में आइपीएफ की जाँच टीम ने किया दौरा

लखनऊ। आइपीएफ के राष्ट्रीय संयोजक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा है कि नीतिश सरकार में प्रशासनिक संरक्षण में दलितों और समाज के कमजोर तबके के लोगों पर हमले हो रहे हैं। प्रशासन द्वारा दिये जा रहे संरक्षण के कारण ही हमलावर ताकतों का मनोबल बढ़ा हुआ है।

आईपीएफ नेता ने दलितों पर हुये हमले के खिलाफ आइपीएफ समेत बिहार के वाम-जनवादी दलों द्वारा चलाये जा रहे आंदोलन का समर्थन करते हुये बिहार सरकार से माँग की है कि वह रोहतास जिले के शिवसागर प्रखण्ड के बड़ी गांव में स्वतंत्रता दिवस के दिन दलितों पर हुये हमले जिसमें तीन दलितों की मौत हुयी है और दर्जन भर करीब घायल हैं, घटना की उच्चस्तरीय जाँच कराये, घटना के जबाबदेह प्रशासनिक अधिकारियों के विरूद्ध कार्रवाई की जाये, तत्काल हमलावरों की गिरफ्तारी की जाये, दलितों की जमीन और उस पर बने रविदास मंदिर के पुनर्निर्माण व सुरक्षा की गारंटी की जाये और घायलों के समुचित इलाज व मृतकों को मुआवजे की व्यवस्था की जाये।

रोहतास जिले के शिवसागर प्रखण्ड़ के बड़ी गांव में स्वतंत्रता दिवस के दिन दलितों पर हुये हमले जिसमें तीन दलितों की मौत हुयी है और दर्जन भर करीब घायल है, की जांच करने आइपीएफ के शाहाबाद प्रभारी रवि शंकर राम के नेतृत्व में गयी जाँच टीम ने घटनास्थल का दौरा किया और जाँचोपरान्त अपनी रिपोर्ट आइपीएफ के राष्ट्रीय संयोजक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह को सौंपी।

रिपोर्ट में बताया गया है कि रोहतास जिले के शिवसागर प्रखण्ड के बड़ी गांव में सड़क के किनारे लगभग तीन डिस्मिल बिहार सरकार की जमीन पर 1982 में संत रविदास की मूर्ति स्थापित कर दलितों ने मंदिर का निर्माण कराया था। जिस पर 1983 में वहाँ की दबंग ताकतों द्वारा कब्जा करने की कोशिश की गयी जिसे तत्कालीन जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के हस्तक्षेप के बाद विफल कर दिया गया। इतना ही नहीं उस समय ही इस जमीन को रविदास मंदिर के नाम बंदोबस्त कर दिया गया। 20 वर्षों बाद कल स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पुनः इस जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया गया, जिस पर वहाँ के दलितों द्वारा किये विरोध से बौखलाये सामन्तों ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इस फायरिंग में तीन दलित मंगरू राम, सुखिया देवी, बेलास राम की मौके पर ही मौत हो गयी और चम्पा देवी, राहुल कुमार, नथुनी आदि 12 व्यक्ति चितांजनक हालत में बनारस, पटना और रोहतास के अस्पतालों में भर्ती है। वहाँ हालत इतनी बुरी थी कि घटना के समय मौजूद पुलिस मूकदर्शक बनी खड़ी रही और सामन्तों द्वारा रविदास की मूर्ति को जमींदोज कर दिया गया। इतना ही नहीं सामन्तों ने पुलिस की मौजूदगी में महिलाओं और बच्चों तक को घसीट-घसीट कर मारा।